बांग्लादेश में जारी राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसक घटनाओं ने पूरे दक्षिण एशिया में चिंता बढ़ा दी है। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोधी नेता उस्मान हादी की मौत के बाद देश के कई हिस्सों में हिंसा भड़क उठी। हालात इतने बिगड़ गए कि उग्र भीड़ ने मीडिया संस्थानों और राजनीतिक कार्यालयों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। बांग्लादेश के सबसे बड़े अखबार डेली स्टार और प्रोथोम अलो के कार्यालयों में आगजनी की गई, वहीं शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग के दफ्तरों को भी जला दिया गया।
इस बीच एक हिंदू युवक की मॉब लिंचिंग की घटना ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक भयावह बना दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भालुका इलाके में ईशनिंदा के आरोप में एक अराजक भीड़ ने युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से पिटाई कर हत्या कर दी। आरोप है कि इसके बाद शव को अपमानजनक तरीके से पेड़ पर लटकाकर आग लगा दी गई। इस जघन्य घटना के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसने आम लोगों को गहरे तक झकझोर दिया है। अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बांग्लादेश में कुछ कट्टरपंथी तत्वों द्वारा भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों पर दावा जताने वाले बयानों के बाद भारत में भी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। खासतौर पर त्रिपुरा में बांग्लादेश की अराजकता और भारत विरोधी बयानबाजी के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन हुए। त्रिपुरा की राजधानी अगरतला में बांग्लादेश उप-उच्चायुक्त कार्यालय के बाहर टिपरा मोथा पार्टी की यूथ विंग ने प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जाहिर किया।
प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर हिंसा को रोकने में विफल रहने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि हालात पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर भारत-बांग्लादेश संबंधों पर भी पड़ सकता है। मौजूदा परिस्थितियों में दोनों देशों के लिए संयम, संवाद और कूटनीतिक पहल बेहद जरूरी हो गई है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा बनी रह सके।
