पाकिस्तान की राजनीति में तोशाखाना मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को इस विवादित केस में 17-17 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह फैसला संघीय जांच एजेंसी (FIA) की विशेष अदालत ने रावलपिंडी स्थित अदियाला जेल में सुनाया, जहां इमरान खान पहले से ही बंद हैं।
यह मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पाकिस्तान की सत्ता, कानून और जवाबदेही व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तोशाखाना क्या है और नियम क्या कहते हैं?
पाकिस्तानी कानून के अनुसार, विदेशी राष्ट्राध्यक्षों या अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से प्राप्त उपहारों को राज्य की संपत्ति माना जाता है। इन्हें सरकारी भंडारगृह यानी तोशाखाना में जमा करना अनिवार्य होता है। यदि कोई प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति इन उपहारों को निजी रूप से रखना चाहता है, तो उसे उनका निर्धारित मूल्य सरकारी खजाने में जमा करना होता है।
इन उपहारों का मूल्यांकन एक आधिकारिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है और बाद में उन्हें नीलाम भी किया जा सकता है, जिससे प्राप्त राशि राष्ट्रीय कोष में जाती है।
इमरान खान पर लगे मुख्य आरोप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि प्रधानमंत्री रहते हुए इमरान खान को करीब 14 करोड़ रुपये मूल्य के 58 कीमती उपहार मिले थे। इनमें सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ओर से दिया गया एक महंगा बुलगारी ज्वैलरी सेट भी शामिल है।
आरोप यह भी है कि इमरान खान ने इन उपहारों को तोशाखाना से बेहद कम कीमत पर खरीदा और बाद में बाजार में बेचकर लाखों रुपये का निजी लाभ कमाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने 2.15 करोड़ रुपये देकर ये गिफ्ट्स खरीदे और लगभग 5.8 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।
कैसे सामने आया पूरा मामला?
इमरान खान के सत्ता से हटने के कुछ महीनों बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के सांसदों ने नेशनल असेंबली के स्पीकर के सामने आरोप पत्र दाखिल किया। आरोप था कि इमरान खान ने तोशाखाना से जुड़े उपहारों की पूरी जानकारी छुपाई और गलत संपत्ति विवरण दिया।
इसके बाद चुनाव आयोग और अन्य जांच एजेंसियों ने मामले की जांच की, जिसमें आरोप सही पाए गए। नतीजतन, इमरान खान की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 63(1)(P) के तहत अयोग्य घोषित किया गया।
इमरान खान का बचाव और अगला कदम
इमरान खान ने शुरू में कहा था कि ये उपहार उन्हें व्यक्तिगत रूप से मिले थे और उन्हें रखने का अधिकार है। बाद में उन्होंने पूरे मामले को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए सभी आरोपों से इनकार किया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि इमरान खान इस फैसले को उच्च अदालतों में चुनौती दे सकते हैं, लेकिन फिलहाल यह मामला पाकिस्तान की राजनीति में एक बड़े मोड़ के तौर पर देखा जा रहा है।
