‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान से जल संरक्षण को नई गति: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में ग्राम सभाओं को मिला विशेष प्रशिक्षण

‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान: जल संरक्षण और आजीविका सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

Cgdarshan
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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जल संरक्षण और सामुदायिक सशक्तिकरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान के अंतर्गत एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम जिला प्रशासन, फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी (FES) और नवनिर्माण चेतना मंच के संयुक्त तत्वावधान में जिला पंचायत के नर्मदा सभा कक्ष में संपन्न हुआ।

इस प्रशिक्षण में सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्राम सभाओं—भाड़ी, देवरीखुर्द, तिलोरा, पथर्रा एवं झिरनापोड़ी—के सदस्य, मेट, सचिव, रोजगार सहायक एवं पंचायत प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, तथा जल आधारित आजीविका संवर्धन के उपायों को व्यवहारिक रूप से समझाना था।

प्रशिक्षक नरेंद्र यादव ने प्रतिभागियों को बताया कि मनरेगा एक मांग-आधारित योजना है, जिसमें ग्राम सभा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ग्राम सभा सामुदायिक आवश्यकताओं की सही पहचान कर योजनाबद्ध तरीके से कार्य प्रस्तावित करती है, तो जल, जंगल और जमीन का बेहतर प्रबंधन संभव है।

कार्यक्रम में “चोटी से घाटी सिद्धांत” को सरल भाषा में समझाया गया। इसके अंतर्गत बताया गया कि भू-जल स्तर बढ़ाने और मिट्टी कटाव रोकने के लिए पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर निचले इलाकों तक चरणबद्ध संरचनाओं का निर्माण आवश्यक है। इसी आधार पर मनरेगा कार्ययोजना में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों को शामिल करने की सलाह दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को सीएलएआरटी (CLART) नामक जीआईएस आधारित टूल की भी जानकारी दी गई। यह टूल यह निर्धारित करने में मदद करता है कि किस क्षेत्र में भू-जल रिचार्ज संरचनाएं और कहाँ सतही जल संग्रहण के उपाय अधिक प्रभावी होंगे। यह तकनीक ग्रामवासियों को स्वयं योजना और डिज़ाइन तैयार करने में सक्षम बनाती है, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आती है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम स्थानीय समुदाय को सतत जल प्रबंधन और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में सशक्त बनाने की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। कार्यक्रम में नवनिर्माण चेतना मंच से चंद्र प्रताप सिंह तथा फाउंडेशन फॉर इकोलॉजिकल सिक्योरिटी से रामेश्वरी पूरी एवं रंजीत पूरी उपस्थित रहे।

 

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