छेरछेरा तिहार 2025: मंत्री टंक राम वर्मा की सहभागिता से जीवंत हुई छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा

छेरछेरा तिहार: लोक आस्था, दान और सामाजिक समरसता का प्रतीक पर्व

CG DARSHAN
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छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत में छेरछेरा तिहार एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस पारंपरिक लोक पर्व के अवसर पर राज्य के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने धरसींवा विकासखंड के ग्राम तरपोंगी पहुंचकर घर-घर अन्न दान ग्रहण कर छेरछेरा की परंपरा को जीवंत किया। गांव में उत्साह, अपनत्व और लोक उल्लास से भरा माहौल देखने को मिला।

लोक परंपरा से जुड़ा जनसंवाद

मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद करते हुए कहा कि छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा हुआ पर्व है। यह लोक उत्सव समाज में समानता, सहयोग और परस्पर सम्मान की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व हमारी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं।

अन्न दान नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव

मंत्री श्री वर्मा ने स्पष्ट किया कि छेरछेरा केवल अन्न संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोक संस्कृति, भाईचारे और मानवीय संवेदनाओं का उत्सव है। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं हमारी पहचान हैं और इन्हें सहेजना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को अपनी विरासत से परिचित कराते हैं।

गांव में दिखी लोक उल्लास की झलक

इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक उल्लास के साथ मंत्री का स्वागत किया। गांव में छेरछेरा तिहार की रौनक देखते ही बन रही थी। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने पूरे उत्साह के साथ लोकगीतों और परंपरागत आयोजनों में भागीदारी निभाई। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

कृषि संस्कृति से गहराई से जुड़ा पर्व

छेरछेरा छत्तीसगढ़ का लोकप्रिय लोक पर्व है, जिसे धान कटाई के बाद पौष मास (दिसंबर–जनवरी) में मनाया जाता है। यह पर्व राज्य की कृषि परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है। फसल कटने के उपरांत किसान ईश्वर और समाज के प्रति आभार प्रकट करता है।

दान, सहयोग और सामाजिक एकता का संदेश

छेरछेरा तिहार दान, सहयोग और आपसी भाईचारे का प्रतीक पर्व है। इस दिन गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग टोली बनाकर घर-घर जाते हैं और लोकगीत गाते हैं—

“छेरछेरा छेरछेरा, माई कोठी के धान ला हेरा…”

इस गीत का भाव समाज के लिए अन्न दान की भावना को दर्शाता है। एकत्रित अन्न का उपयोग सामूहिक भोज, जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक कार्यों में किया जाता है।

सांस्कृतिक विरासत को संजोने का संदेश

छेरछेरा तिहार अमीर-गरीब और जाति-धर्म के भेद से ऊपर उठकर सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देता है। यह पर्व नई पीढ़ी को साझा संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ते हुए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने का सशक्त संदेश देता है।

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