विचारधारा से दूर होती सियासत, धन-बाहुबल के बढ़ते असर पर अजीत पवार का बड़ा बयान

अजीत पवार का दावा: महाराष्ट्र की राजनीति में विचारधारा पीछे, धन और बाहुबल आगे

CG DARSHAN
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख अजीत पवार ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में विचारधारा की भूमिका लगातार कमजोर होती जा रही है, जबकि धन और बाहुबल का प्रभाव खुले तौर पर देखने को मिल रहा है। पवार का यह बयान आगामी नगर निगम चुनावों से पहले सियासी बहस को तेज करने वाला माना जा रहा है।

पीटीआई को दिए एक साक्षात्कार में अजीत पवार ने कहा कि अधिकांश राजनीतिक दल अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुके हैं। उनके मुताबिक, दल-बदल अब सामान्य प्रक्रिया बन गया है, जहां नेताओं को प्रलोभन देकर या दबाव बनाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में लंबित जांचों का हवाला देकर नेताओं पर दबाव बनाया जाता है और उन्हें पद छोड़ने के बाद राहत दिलाने का आश्वासन दिया जाता है।

डिप्टी सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि आज उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनके सामाजिक कार्य या नेतृत्व क्षमता के बजाय चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल सर्वेक्षणों के माध्यम से यह पता लगाते हैं कि किसी क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय चेहरा कौन है, और यदि वह विपक्ष से जुड़ा हो तो उसे अपने खेमे में लाने की कोशिश की जाती है।

पवार ने पुणे और पिंपरी-चिंचवड नगर निगमों को लेकर भाजपा के स्थानीय नेतृत्व पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीते आठ-नौ वर्षों में भारी खर्च के बावजूद दूरदर्शी योजना की कमी के कारण इन नगर निकायों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि एनसीपी, भाजपा के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन का हिस्सा है। ऐसे में अजीत पवार का यह बयान न केवल राजनीतिक व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि नगर निगम चुनावों से पहले गठबंधन की राजनीति को भी नई दिशा दे सकता है।

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