संसद के बजट सत्र के दौरान सोमवार को लोकसभा में भारी हंगामा देखने को मिला, जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब का हवाला देते हुए चीन की सेना पर भारतीय सीमा में घुसपैठ का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने दावा किया कि डोकलाम क्षेत्र में चार चीनी टैंक भारतीय सीमा के भीतर आ गए थे। इस बयान पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे सदन में जबरदस्त शोर-शराबा हुआ।
लगातार व्यवधान के चलते पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल को लोकसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी और अंततः सदन को मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बच रही है और सच्चाई छुपा रही है।
राहुल गांधी का प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा निशाना
राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करते हुए कहा,
“मैं राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलना चाहता था, लेकिन मुझे बोलने नहीं दिया गया। पूर्व सेना प्रमुख ने रक्षा मंत्री और प्रधानमंत्री से क्या कहा था, यह देश को जानने का अधिकार है। जब चीन हमारी सीमा के भीतर आ रहा था, तब 56 इंच की छाती कहां थी?”
उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ जमीन खोने या न खोने का सवाल नहीं है, बल्कि नेतृत्व की जिम्मेदारी और निर्णायक फैसले लेने का मुद्दा है। उनके मुताबिक प्रधानमंत्री को कठिन फैसले लेने चाहिए थे, न कि जिम्मेदारी दूसरों पर डालनी चाहिए थी।
राहुल गांधी ने उठाए ये अहम सवाल
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वे केवल दो-तीन लाइनें बोलना चाहते थे, क्योंकि यह सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। उन्होंने दावा किया कि वे वही बात रखना चाहते थे, जो पूर्व सेना प्रमुख ने अपनी किताब में लिखी है और जो बातचीत उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री के साथ की थी।
सरकार का पलटवार
सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के आरोपों को “भ्रामक और राजनीतिक” बताया और कहा कि सरकार ने हमेशा सीमा की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। हालांकि, इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव जारी है और आने वाले दिनों में संसद में इस पर और बहस होने की संभावना है।

