मतदाता सूची विवाद में SIR को मिली 7 दिन की राहत, बंगाल सरकार–DGP को नोटिस

Bengal SIR Case: सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, डेडलाइन बढ़ी और प्रशासन से मांगा जवाब

CG DARSHAN
2 Min Read
2 Min Read

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम हस्तक्षेप किया है। विधानसभा चुनाव से पहले चल रही इस प्रक्रिया की समयसीमा को अदालत ने एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि SIR से जुड़े सभी 8,500 से अधिक अधिकारी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) को ही रिपोर्ट करेंगे। कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित इस संवेदनशील प्रक्रिया में किसी भी तरह की बाधा स्वीकार्य नहीं होगी।

अदालत ने प्रशासन को किया जवाबदेह

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा आयोग के नोटिस जलाए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। FIR दर्ज न होने पर कोर्ट ने चिंता भी जताई।

कोर्टरूम में अनुशासन पर टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं के बीच हस्तक्षेप पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत कोई सार्वजनिक मंच नहीं है और यहां अनुशासन व मर्यादा का पालन अनिवार्य है।

ममता बनर्जी की आपत्ति

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इस पुनरीक्षण के कारण समाज के कमजोर वर्गों के लाखों मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि SIR के दौरान किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

अदालत ने यह भी कहा कि देशभर में स्थानीय भाषाओं और बोलियों के कारण नामों की वर्तनी में अंतर सामान्य है और इसे मतदाता सूची से बाहर करने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि संविधान सभी राज्यों में समान रूप से लागू होता है।

Share This Article
Leave a Comment