सुप्रीम कोर्ट ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर दायर एक और याचिका पर सुनवाई के लिए हरी झंडी दे दी है। यह याचिका चार प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा दाखिल की गई है, जिन्होंने मुख्यमंत्री पर एक विशेष समुदाय के खिलाफ भड़काऊ और विभाजनकारी बयान देने का आरोप लगाया है।
इससे पहले मंगलवार को भी शीर्ष अदालत ने इसी मुद्दे से जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई करने की बात कही थी। वह याचिका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा ने दायर की थी। उसमें एक वायरल वीडियो का उल्लेख किया गया था, जिसमें कथित तौर पर मुख्यमंत्री को एक समुदाय की ओर राइफल तानते हुए दिखाया गया था।
बुधवार को अदालत से अनुरोध किया गया कि नई याचिका को पहले से लंबित मामले के साथ ही सूचीबद्ध किया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने संक्षेप में कहा, “हम इस पर विचार करेंगे।”
नई याचिका पूर्व प्रोफेसर हिरेन गोहेन, असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक हरेकृष्ण डेका, वरिष्ठ पत्रकार परेश चंद्र मलाकर और वरिष्ठ अधिवक्ता शांतनु बोरठाकुर ने दायर की है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर विवादित बयान दिए हैं, जिनसे असम में बंगाली मूल के मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव, सामाजिक बहिष्कार और हिंसा भड़कने का खतरा है।
याचिकाकर्ताओं का यह भी कहना है कि मुख्यमंत्री ने अपने भाषणों और मीडिया बातचीत में धर्म, भाषा और जन्मस्थान के आधार पर नफरत को बढ़ावा दिया। साथ ही उन पर ‘मिया’ और ‘बांग्लादेशी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर एक समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है।
अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में इस पर विस्तृत सुनवाई होने की संभावना है।

