बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव ने देश की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ ला दिया है। Bangladesh Nationalist Party (BNP) के वरिष्ठ नेता और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले Goyeshwar Chandra Roy ने ढाका-3 सीट पर उल्लेखनीय जीत दर्ज की है। उन्होंने 99,163 मत प्राप्त कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद शाहिनुर इस्लाम को पराजित किया, जो Jamaat-e-Islami के उम्मीदवार थे।
यह परिणाम कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। 1971 में स्वतंत्रता के बाद पहली बार राजधानी क्षेत्र से किसी हिंदू नेता का संसद तक पहुंचना राजनीतिक समावेशन की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है। हाल के समय में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और प्रतिनिधित्व को लेकर उठते सवालों के बीच यह जीत एक सकारात्मक संदेश देती है।
देश में पिछले महीनों के दौरान सांप्रदायिक तनाव और कुछ हिंसक घटनाओं ने राजनीतिक माहौल को संवेदनशील बना दिया था। ऐसे परिदृश्य में ढाका जैसे प्रमुख निर्वाचन क्षेत्र से अल्पसंख्यक नेता की विजय लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को मजबूत करती है।
खुलना-1 सीट पर जमात-ए-इस्लामी के इकलौते हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को हार का सामना करना पड़ा। यहां BNP प्रत्याशी अमीर एजाज खान ने 1,21,352 वोटों के साथ स्पष्ट बढ़त हासिल की।
300 सदस्यीय जातीय संसद की 299 सीटों पर मतदान हुआ, जबकि शेरपुर-3 सीट पर एक प्रत्याशी के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया। बहुमत के लिए 150 सीटों की आवश्यकता होती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार BNP को दो-तिहाई बहुमत मिला है, जिससे करीब दो दशक बाद उसकी सत्ता में वापसी लगभग सुनिश्चित मानी जा रही है।
संसद में 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनका आवंटन सामान्य सीटों पर दलों के प्रदर्शन के अनुपात में किया जाता है।
इन चुनाव नतीजों ने स्पष्ट कर दिया है कि बांग्लादेश की जनता बदलाव और स्थिर नेतृत्व चाहती है। BNP की प्रचंड जीत और गायेश्वर चंद्र रॉय की ऐतिहासिक सफलता आने वाले वर्षों में देश की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

