विश्व रेडियो दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में आयोजित विशेष कार्यक्रम में विष्णु देव साय ने कहा कि रेडियो की दशकों पुरानी विश्वसनीयता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आधुनिक तकनीक मिलकर जनसेवा को नई दिशा दे सकती है। इस अवसर पर उन्होंने वंदे मातरम के नवीन गायन संस्करण का डिजिटल लॉन्च भी किया।
कार्यक्रम का आयोजन आकाशवाणी रायपुर और यूनेस्को के सहयोग से हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि “रेडियो और एआई” आज के सूचना युग की आवश्यकता है। एआई तकनीक से कंटेंट को अधिक सटीक, त्वरित और प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे मौसम अपडेट, कृषि मार्गदर्शन, स्वास्थ्य सलाह और आपातकालीन सूचनाएं तुरंत लोगों तक पहुंच सकें।
उन्होंने कहा कि आकाशवाणी आज भी देश का सबसे भरोसेमंद समाचार माध्यम है, जिसने प्रतिस्पर्धा के दौर में भी संतुलित और जनहितकारी प्रसारण की परंपरा को कायम रखा है। छत्तीसगढ़ में छह रेडियो केंद्र संचालित हैं और विविध भारती सेवा के जरिए व्यापक प्रसारण किया जा रहा है। स्थानीय भाषाओं—छत्तीसगढ़ी, गोंडी और हल्बी—में कार्यक्रमों से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत जुड़ाव बना है।
मुख्यमंत्री ने नवा रायपुर में स्थापित किए जा रहे देश के पहले एआई डेटा सेंटर पार्क का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और तकनीकी क्षेत्रों में नवाचार को गति मिलेगी। डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन की योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य तेजी से साकार हो रहा है।
कार्यक्रम में यूनेस्को की क्षेत्रीय सलाहकार हज़्ज़ाज़ मा’अली ने भी रेडियो की वैश्विक विश्वसनीयता और एआई के साथ उसके भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि रेडियो और एआई का समन्वय विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

