छत्तीसगढ़ सरकार ने आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाते हुए फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारकों के खिलाफ निर्णायक अभियान शुरू कर दिया है। राजधानी रायपुर में आयोजित उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति की बैठक में 17 गंभीर मामलों की विस्तार से सुनवाई की गई।
आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में स्पष्ट संदेश दिया गया कि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पांच मामलों में संबंधित व्यक्तियों को अंतिम अवसर देते हुए आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जबकि एक मामले में विजिलेंस टीम को पुनः जमीनी जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है तो उसे तत्काल निरस्त किया जाएगा। साथ ही संबंधित व्यक्ति को सरकारी नौकरी या शैक्षणिक प्रवेश में मिले सभी आरक्षण लाभों से वंचित कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सेवा समाप्ति और दंडात्मक प्रावधान भी शामिल हो सकते हैं।
समिति अब लगभग 250 लंबित मामलों का तेजी से निपटारा कर रही है। जल्द ही उन विभागों को नोटिस जारी किए जाएंगे जहां संदिग्ध कर्मचारी वर्तमान में कार्यरत हैं। सरकार की इस सक्रियता से पारदर्शिता बढ़ने और वास्तविक पात्रों को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

