छत्तीसगढ़ के Mahasamund जिला मुख्यालय में तैयार हो रहा गौरव पथ इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से 2.3 किलोमीटर लंबी इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग (PWD) की देखरेख में किरण बिल्डकॉन, बेमेतरा द्वारा किया जा रहा है।
मई 2025 में शुरू हुई यह परियोजना फरवरी तक पूरी होनी थी, लेकिन अब तक सिर्फ लगभग एक-तिहाई कार्य ही पूरा हो सका है। देरी के साथ-साथ निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
नालियों और पोल शिफ्टिंग में मानकों की अनदेखी?
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सड़क के दोनों ओर बन रही नालियों, पेड़ों की कटाई और बिजली पोल शिफ्टिंग के दौरान निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा। जहां मैन्युअल कार्य अपेक्षित है, वहां जेसीबी मशीनों का उपयोग किए जाने से नगर पालिका की मुख्य जल आपूर्ति पाइपलाइन कई बार क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
इसका परिणाम यह है कि सैकड़ों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है और वार्डवासियों को 2 से 4 दिनों तक पानी की किल्लत झेलनी पड़ रही है।
प्रशासन का सख्त रुख
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद कलेक्टर Vinay Kumar Langeh ने मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने गौरव पथ निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए थर्ड पार्टी जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। इस समिति में विभिन्न विभागों के इंजीनियर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे, जो कार्य की तकनीकी गुणवत्ता और मानकों की समीक्षा करेंगे।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद क्या सुधारात्मक कदम उठाए जाते हैं और क्या जनता को समय पर सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण सड़क मिल पाएगी।

