नक्सलवाद के अंत की उलटी गिनती शुरू! 2026 तक छत्तीसगढ़ होगा सुरक्षित, 400 कैंप बनेंगे विकास केंद्र

CG DARSHAN
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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में तेजी से बढ़ते कदम अब बड़े बदलाव का संकेत दे रहे हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री Vijay Sharma ने घोषणा की है कि 31 मार्च 2026 तक राज्य को पूरी तरह नक्सलवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिस पर तेजी से काम जारी है।

Jagdalpur में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि यह केवल सुरक्षा अभियान नहीं, बल्कि बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की दिशा में ऐतिहासिक पहल है।

तकनीक बनी गेमचेंजर

नक्सल विरोधी अभियान में आधुनिक तकनीक ने अहम भूमिका निभाई है। Indian Space Research Organisation, National Technical Research Organisation, Indo-Tibetan Border Police और National Security Guard के सहयोग से ऑपरेशन ज्यादा सटीक और प्रभावी हुए हैं।

रणनीति का असर, कमजोर पड़ा नक्सल नेटवर्क

गृहमंत्री ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah द्वारा अगस्त 2024 में तय समयसीमा के तहत राज्य ने रणनीतिक कार्रवाई की।
डीकेजेडसी स्तर के नक्सली पापा राव का आत्मसमर्पण इस बात का संकेत है कि अब नक्सलियों का शीर्ष नेतृत्व भी दबाव में है।

हजारों नक्सली लौटे मुख्यधारा में

पिछले दो वर्षों में 3000 से अधिक नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2000 से ज्यादा गिरफ्तार हुए और करीब 500 मुठभेड़ों में निष्प्रभावी हुए।
कुल मिलाकर 5000 से अधिक सशस्त्र कैडर की कमी से नक्सल संगठन की रीढ़ कमजोर हुई है।

अब राज्य में डीकेजेडसी स्तर का कोई सक्रिय माओवादी नहीं बचा है और सिर्फ 30-40 नक्सली ही दूरस्थ इलाकों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

बस्तर में सुरक्षा से विकास की ओर बदलाव

Bastar का लगभग 95% इलाका अब नक्सल प्रभाव से बाहर आ चुका है।
सरकार अब इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है।

करीब 400 सुरक्षा कैंपों को चरणबद्ध तरीके से विकास केंद्रों में बदला जाएगा, जहां भविष्य में स्कूल, अस्पताल, थाना और वनोपज प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।

समाज की भागीदारी से मिली सफलता

इस अभियान में स्थानीय आदिवासी समुदाय—मुरिया, मारिया, गोंड और हलबा समाज—के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों और मीडिया की अहम भूमिका रही है।
समाज द्वारा पुनर्वासित नक्सलियों को अपनाने से विश्वास का माहौल बना और हिंसा का दायरा सिमटता गया।

गृहमंत्री ने इसे “भय से विश्वास और बंदूक से विकास की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़” बताते हुए कहा कि आने वाला समय राज्य के लिए नई संभावनाओं का होगा।

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