भारतीय वेटलिफ्टिंग की स्टार मीराबाई चानू एक बार फिर अपने करियर के सबसे बड़े लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में जुट गई हैं। ओलंपिक और विश्व स्तर पर शानदार प्रदर्शन करने वाली चानू अब एशियाई खेलों में पदक जीतकर अपने करियर की एकमात्र अधूरी उपलब्धि को पूरा करना चाहती हैं।
31 वर्षीय चानू ने हाल ही में खेलो इंडिया जनजातीय खेल के दौरान मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि एशियाई खेल उनके लिए बेहद अहम हैं। उन्होंने इसे “अधूरा मिशन” बताते हुए कहा कि यहां का स्तर काफी ऊंचा होता है, जिससे यह प्रतियोगिता और चुनौतीपूर्ण बन जाती है।
चानू का एशियाई खेलों का सफर अब तक आसान नहीं रहा है। 2014 में डेब्यू करते हुए वह नौवें स्थान पर रहीं, जबकि 2018 में चोट के कारण बाहर हो गईं। 2022 में वह पदक जीतने के बेहद करीब थीं, लेकिन कूल्हे की चोट ने उनके अभियान को प्रभावित कर दिया और वह मामूली अंतर से चूक गईं।
अब वह इस बार को अपने करियर का निर्णायक मौका मान रही हैं। हालांकि, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती फिटनेस और वजन संतुलन की है। वह राष्ट्रमंडल खेल में 48 किलोग्राम वर्ग में भाग लेंगी, जबकि एशियाई खेलों के लिए उन्हें 49 किलोग्राम वर्ग में वापसी करनी होगी। इतने कम समय में शरीर को इस बदलाव के लिए तैयार करना आसान नहीं है, लेकिन चानू इसके लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
इसके अलावा, चानू ने खेलो इंडिया जनजातीय खेलों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल दूरदराज के इलाकों के खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, देश के हर कोने में प्रतिभा मौजूद है, जिसे सही मंच मिलने पर निखारा जा सकता है।
मीराबाई चानू का यह दृढ़ निश्चय और संघर्ष उन्हें खास बनाता है। अब सभी की नजरें एशियाई खेलों पर टिकी हैं, जहां वह अपने करियर की सबसे बड़ी कमी को पूरा कर इतिहास रचने के इरादे से मैदान में उतरेंगी।

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