छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिला प्रतिनिधित्व का असमान वितरण, 41 निर्वाचन क्षेत्रों में अब तक महिला विधायक निर्वाचित नहीं

CG DARSHAN
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छत्तीसगढ़ राज्य में महिला प्रतिनिधित्व की वर्तमान स्थिति का विश्लेषण यह दर्शाता है कि समग्र संख्या में वृद्धि के बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर असमान वितरण की स्थिति विद्यमान है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य गठन के समय जहां केवल 6 महिला विधायक थीं, वहीं वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 19 हो गई है, जो कुल विधानसभा सदस्यों का लगभग 21 प्रतिशत है।

यद्यपि यह वृद्धि सकारात्मक प्रवृत्ति को इंगित करती है, तथापि राज्य के 41 निर्वाचन क्षेत्रों में अब तक किसी भी समय महिला विधायक का निर्वाचन नहीं होना प्रतिनिधित्व के संतुलन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण तथ्य है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, सरगुजा एवं बस्तर संभाग के विभिन्न क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो भौगोलिक एवं सामाजिक विविधता को प्रदर्शित करते हैं।

राजधानी रायपुर की सभी विधानसभा सीटों तथा बिलासपुर जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व का अभाव विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इन क्षेत्रों को उच्च शिक्षित एवं राजनीतिक रूप से सक्रिय माना जाता है, इसके बावजूद महिला उम्मीदवारों का निर्वाचित न होना चुनावी संरचना एवं प्रक्रिया के विश्लेषण की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

इसके विपरीत, राज्य के कुछ आदिवासी एवं अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व की उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक रही है, जो क्षेत्रीय सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों के प्रभाव को इंगित करता है। यह विभाजन राज्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व के विविध आयामों को स्पष्ट करता है।

संसद में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक के संदर्भ में आयोजित विशेष सत्र इस परिदृश्य में संभावित संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत देता है। उक्त विधेयक के क्रियान्वयन की स्थिति में राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों में महिला प्रतिनिधित्व के विस्तार की संभावना व्यक्त की गई है, जिससे वर्तमान असमानताओं को संतुलित करने की दिशा में प्रगति संभव हो सकती है।

इस संदर्भ में आवश्यक है कि नीति निर्माण, दलगत रणनीति एवं निर्वाचन प्रक्रिया के स्तर पर समन्वित प्रयास किए जाएं, जिससे समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

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