लोकसभा परिसीमन 2026 के अंतर्गत प्रस्तावित विधेयकों से सीट संख्या 850 तक विस्तार एवं बहुमत मानक में परिवर्तन

CG DARSHAN
CG DARSHAN 2 Min Read
2 Min Read
Advertisement Carousel

भारत सरकार द्वारा लोकसभा परिसीमन 2026 के अंतर्गत प्रस्तावित विधायी परिवर्तनों के माध्यम से संसद की संरचना में व्यापक संशोधन किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। संसद के विशेष सत्र में प्रस्तुत किए जाने वाले तीन विधेयक इस संदर्भ में केंद्रीय महत्व रखते हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिनिधित्व प्रणाली को अद्यतन करना एवं आरक्षण प्रावधानों को प्रभावी बनाना है।

प्रस्तावित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के अंतर्गत लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बहुमत निर्धारण का मानक भी परिवर्तित होकर 426 निर्धारित किया जाएगा, जो भविष्य में सरकार गठन की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

परिसीमन विधेयक, 2026 के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण नवीनतम जनगणना आंकड़ों के आधार पर किया जाना प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत राज्यों के बीच सीटों का पुनर्वितरण किया जाएगा, जिससे जनसंख्या अनुपात के अनुरूप प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।

केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के अंतर्गत संबंधित क्षेत्रों में सीट समायोजन एवं आरक्षण प्रावधानों को लागू किया जाएगा। इसके साथ ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पर्याप्त संख्या में सीटों को महिलाओं के लिए आरक्षित किए जाने का प्रावधान भी सम्मिलित है।

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, लगभग 273 सीटों को महिला प्रतिनिधित्व के लिए आरक्षित किए जाने की संभावना है, जिससे संसद में लैंगिक संतुलन को सुदृढ़ किया जा सके। यह पहल विधायी संस्थानों में समावेशी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक संरचनात्मक कदम के रूप में परिलक्षित होती है।

उक्त विधेयकों पर संसद में विस्तृत विचार-विमर्श निर्धारित किया गया है, जिसके उपरांत आवश्यक विधायी प्रक्रिया के माध्यम से इनका क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा। यह परिवर्तन भारतीय संसदीय प्रणाली में दीर्घकालिक प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता रखता है।

Share This Article
Leave a comment