वीडियोकॉन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने एक बार फिर बड़ा खुलासा करते हुए 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग के जटिल अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। इस मामले में वीडियोकॉन ग्रुप के पूर्व सीईओ वीएन धूत और 12 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही विशेष अदालत संज्ञान ले चुकी है, वहीं अब पूरक आरोपपत्र में यूके स्थित कारोबारी सचिन देव दुग्गल को भी आरोपी बनाया गया है।
ईडी की जांच के मुताबिक, यह पूरा घोटाला विदेशी कंपनियों और वित्तीय संस्थाओं के जाल के जरिए अंजाम दिया गया। बैंकों से प्राप्त भारी-भरकम क्रेडिट सुविधा का उपयोग कथित तौर पर विदेशी तेल और गैस परियोजनाओं के लिए दिखाया गया, लेकिन असल में धनराशि को अलग-अलग विदेशी संस्थाओं के माध्यम से डायवर्ट किया गया। एजेंसी का दावा है कि यह प्रक्रिया बेहद योजनाबद्ध तरीके से कई वर्षों तक चलती रही।
जांच में यह भी सामने आया कि 2008 से शुरू हुई इस योजना के तहत बिना किसी औपचारिक ऋण समझौते के करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया। बाद में दस्तावेजों के जरिए इन लेनदेन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। 2011 से 2014 के बीच कई कंपनियों के माध्यम से विदेशी खातों में धन ट्रांसफर किया गया, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग के स्पष्ट संकेत मिले हैं।
ईडी ने पाया कि कॉर्पोरेट ढांचे में फेरबदल कर स्वामित्व और नियंत्रण को एक ही समूह के भीतर केंद्रित रखा गया। इससे फंड्स की वास्तविक आवाजाही को छिपाना आसान हो गया। हालांकि, इन पैसों का अंतिम उपयोग अब भी स्पष्ट नहीं हो पाया है, जो जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
एजेंसी ने यह भी बताया कि कई बार समन जारी होने के बावजूद कुछ आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और केवल सीमित दस्तावेज ही उपलब्ध कराए गए हैं। ऐसे में आने वाले समय में कानूनी कार्रवाई और तेज होने की संभावना है। यह मामला देश के सबसे बड़े आर्थिक अपराधों में से एक के रूप में सामने आ रहा है, जिस पर अब सभी की नजरें टिकी हैं।

