छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए आने वाले समय में खर्च बढ़ना तय माना जा रहा है। संकेत मिल रहे हैं कि जून महीने से बिजली दरों में बढ़ोतरी लागू हो सकती है, जिससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के मासिक बिल पर सीधा असर पड़ेगा। फिलहाल नई दरों की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
राज्य की बिजली वितरण कंपनियों द्वारा प्रस्तुत किए गए घाटे के आंकड़ों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। करीब 6,300 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा किया गया है, जिस पर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग विचार कर रहा है। आयोग के सामने चुनौती यह है कि वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ कम से कम डाला जाए।
दिलचस्प बात यह है कि कंपनी के मौजूदा वित्तीय आंकड़े सीधे तौर पर घाटे की ओर इशारा नहीं करते। अनुमानित राजस्व 26,216 करोड़ रुपये और खर्च 25,460 करोड़ रुपये बताया गया है, जिससे कंपनी लाभ में दिखती है। हालांकि, पिछले वर्षों के घाटे को जोड़ने के बाद कुल वित्तीय दबाव बढ़कर 32,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जिससे टैरिफ बढ़ाने की जरूरत सामने आई है।
यदि नियामक आयोग कंपनी के प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो बिजली दरों में करीब 20 प्रतिशत तक की वृद्धि संभव है। यह बढ़ोतरी पिछले साल की तुलना में काफी अधिक होगी, जब केवल 500 करोड़ रुपये के घाटे के आधार पर महज 2 प्रतिशत टैरिफ बढ़ाया गया था।
आमतौर पर नई बिजली दरें अप्रैल से लागू कर दी जाती हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया में देरी हुई है। आयोग सभी पहलुओं की विस्तृत समीक्षा कर रहा है और संतुलित फैसला लेने की कोशिश में है।
सूत्रों के अनुसार, जून तक नई दरों का ऐलान किया जा सकता है। इसके बाद बिजली उपभोक्ताओं को बढ़े हुए बिल का सामना करना पड़ सकता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ने की आशंका है।

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