RG Kar News: गवाह संजीव मुखर्जी ने मांगी सुरक्षा, चुनाव नतीजों के बाद घर में तोड़फोड़ का आरोप

CG DARSHAN
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चर्चित RG Kar News मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। आरजी कर अस्पताल केस के गवाह और मृतका के पड़ोसी संजीव मुखर्जी ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुरक्षा की मांग की है। दरअसल उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके घर में तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा उन्होंने कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई करने की भी अपील की। हालांकि अदालत ने फिलहाल तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया है।

चुनाव नतीजों के बाद बढ़ा विवाद

संजीव मुखर्जी का दावा है कि वह RG Kar News केस में सरकारी गवाह हैं। वहीं दूसरी ओर उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कुछ लोगों ने उनके घर को निशाना बनाया। साथ ही उनके वकील ने अदालत को बताया कि मुखर्जी को अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा महसूस हो रहा है। इसलिए कोर्ट से जल्द सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। नतीजतन यह मामला अब और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की बेंच ने मामले की सुनवाई की। हालांकि अदालत ने तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि पहले औपचारिक याचिका दाखिल की जाए और सभी पक्षों को नोटिस भेजे जाएं। इसी बीच कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई सूची में नंबर आने के बाद ही होगी। कुल मिलाकर अदालत ने फिलहाल किसी भी तरह की त्वरित राहत देने से इनकार कर दिया।

संजय रॉय को मिल चुकी है उम्रकैद

वकील ने कोर्ट को बताया कि संजीव मुखर्जी उस दुष्कर्म और हत्या मामले के गवाह हैं, जिसमें संजय रॉय को दोषी ठहराया गया था। RG Kar News केस में सियालदह सत्र अदालत पहले ही संजय रॉय को उम्रकैद की सजा सुना चुकी है। इसके बाद अब गवाह के सुरक्षा मांगने से मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। खासतौर पर चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है।

पीड़िता की मां की जीत के बाद मामला चर्चा में

गौरतलब है कि आरजी कर अस्पताल की पीड़िता की मां ने हाल ही में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। वहीं इसी के बाद RG Kar News में गवाह ने खुद पर हमले और घर में तोड़फोड़ का आरोप लगाया है। हालांकि अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए अब सभी की नजरें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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