छत्तीसगढ़ सरकार कृषि विकास को नई दिशा देना चाहती है। इसके अलावा किसानों की आय बढ़ाने पर निरंतर कार्य हो रहा है। बासमती धान मिशन इसी उद्देश्य के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। वहीं विभागीय समन्वय को भी मजबूत किया जा रहा है।
संस्थागत सहयोग पर विशेष बल
बैठक में विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। साथ ही कृषि विशेषज्ञों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बासमती धान मिशन के लिए संस्थागत सहयोग महत्वपूर्ण माना गया। इसलिए बहुस्तरीय कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
वैश्विक मांग से मिलेगा लाभ
सुगंधित चावल की मांग कई देशों में मौजूद है। दरअसल अंतरराष्ट्रीय बाजार बेहतर मूल्य प्रदान करता है। इसके अलावा निर्यात अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। नतीजतन किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।
क्षेत्र चयन और उत्पादन विस्तार
राज्य में उपयुक्त क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिक मानकों का पालन होगा। बासमती धान मिशन के अंतर्गत उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजना बनाई गई है। साथ ही किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाएगा।
उत्पादन से निर्यात तक समन्वित तंत्र
फेडरेशन ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इसके बाद विपणन व्यवस्था को मजबूत करने पर चर्चा हुई। बासमती धान मिशन के तहत बायबैक और निर्यात तंत्र विकसित किया जाएगा। कुल मिलाकर यह पहल कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दे सकती है।

