करीब साढ़े तीन महीने तक चले तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदें बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अमेरिका-ईरान समझौता वैश्विक राजनीति के साथ-साथ ऊर्जा बाजार के लिए भी अहम माना जा रहा है। हालांकि मसौदे की कई शर्तों पर सहमति बनने के बावजूद कुछ विवाद अब भी कायम हैं।
समझौते में सबसे अहम बातें क्या हैं?
प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य युद्ध समाप्त करना, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना और परमाणु विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाना है।
युद्धविराम पर बनी सहमति
ड्राफ्ट के अनुसार क्षेत्रीय मोर्चों पर संघर्ष को रोकने और स्थायी युद्धविराम लागू करने की दिशा में दोनों पक्ष आगे बढ़ रहे हैं। यह कदम पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने की कोशिश माना जा रहा है।
प्रतिबंधों में ढील
ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटाए जा सकते हैं। इससे ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से सक्रिय होने का मौका मिलेगा।
परमाणु कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति
ईरान को नागरिक उपयोग के लिए परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम जारी रखने की छूट मिलने की संभावना है। यह बिंदु ईरान की प्रमुख मांगों में शामिल था।
समझौते में कौन ज्यादा झुकता दिख रहा है?
अमेरिका ने बदली कई पुरानी शर्तें
युद्ध की शुरुआत में अमेरिका ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध चाहता था। लेकिन वर्तमान मसौदे में इन मुद्दों पर उसका रुख अपेक्षाकृत नरम दिखाई देता है।
ईरान ने भी दिखाई लचीलापन
अमेरिका-ईरान समझौता के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था पर चर्चा के लिए सहमति जताई है। इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रयासरत हैं।
भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह समझौता?
भारत की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा आयातित ऊर्जा पर निर्भर करता है। इसलिए इस समझौते का असर सीधे भारतीय उपभोक्ताओं और उद्योगों पर पड़ सकता है।
सस्ता हो सकता है कच्चा तेल
ईरान के बाजार में लौटने से वैश्विक स्तर पर तेल की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे कीमतों में कमी आने की संभावना है, जो भारत के लिए राहत भरी खबर होगी।
नए ऊर्जा विकल्प मिलेंगे
प्रतिबंध हटने के बाद भारतीय कंपनियों को ईरान से तेल आयात का विकल्प फिर मिल सकता है। इससे ऊर्जा स्रोतों में विविधता आएगी और आपूर्ति जोखिम कम होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्या है समझौता?
वैश्विक ऊर्जा का अहम मार्ग
दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। युद्ध के दौरान इस मार्ग पर अनिश्चितता से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हुआ था।
भारत के लिए फायदा और चुनौती दोनों
अमेरिका-ईरान समझौता के तहत मार्ग को फिर से खोलने की योजना है, जिससे तेल आपूर्ति सामान्य हो सकती है। हालांकि ईरान द्वारा सेवा शुल्क वसूले जाने की संभावना भारत के आयात खर्च को कुछ हद तक बढ़ा सकती है।
अभी किन मुद्दों पर फंसी है बात?
यूरेनियम संवर्धन विवाद
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम भंडार को कम करे, जबकि ईरान इसे अपने अधिकारों से जुड़ा विषय मानता है।
मिसाइल कार्यक्रम पर टकराव
ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को बातचीत का हिस्सा नहीं बनाना चाहता, जबकि अमेरिका और इस्राइल इसे सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा मानते हैं।
जब्त संपत्तियों की वापसी
ईरान चाहता है कि विदेशों में जमा उसकी संपत्तियां जल्द लौटाई जाएं, लेकिन अमेरिका चरणबद्ध प्रक्रिया पर जोर दे रहा है।
क्या समझौता क्षेत्र में स्थायी शांति ला पाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौता पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। हालांकि कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी बाकी है। यदि दोनों पक्ष अपने मतभेद दूर कर लेते हैं तो यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक परिणाम ला सकता है।

