जीवा परियोजना से जशपुर के 13 हजार से अधिक परिवारों को लाभ

CG DARSHAN
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जशपुर जिले में संचालित जीवा परियोजना और वाड़ी विकास कार्यक्रम ने हजारों किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। नाबार्ड के अनुसार इन योजनाओं के माध्यम से 13 हजार से अधिक आदिवासी परिवारों को सीधे लाभ मिला है। कृषि आधारित गतिविधियों और फलोद्यान विकास के जरिए ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हुई है तथा रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

प्राकृतिक खेती को मिल रहा प्रोत्साहन

जीवा परियोजना के अंतर्गत किसानों को प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान प्राकृतिक आदानों के नए प्रयोग और तकनीक विकसित कर रहे हैं, जिससे पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल खेती की लागत कम करने और उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक साबित हो रही है।

किसानों की आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा

नाबार्ड अधिकारियों ने बताया कि जीवा परियोजना और अन्य कृषि गतिविधियों से जुड़े किसानों ने पिछले पांच वर्षों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का संचयी लाभ अर्जित किया है। यह सफलता ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। परियोजना का प्रभाव जिले के कई गांवों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

उत्पादन और रोजगार में बढ़ोतरी

वर्तमान में जीवा परियोजना और वाड़ी कार्यक्रमों के तहत हर वर्ष लगभग 25 करोड़ रुपये का आर्थिक लाभ और 9 हजार मीट्रिक टन उत्पादन प्राप्त हो रहा है। इससे किसानों की आय के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिला है।

भविष्य में और विस्तार की तैयारी

नाबार्ड और जिला प्रशासन अब जीवा परियोजना को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। प्राकृतिक खेती, बागवानी और कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर अधिक किसानों को इससे जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। इससे जशपुर जिले में कृषि आधारित विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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