Chhattisgarh Madrasa Board पर बड़ा प्रस्ताव, आधुनिक शिक्षा की उठी मांग आज

CG DARSHAN
CG DARSHAN 4 Min Read
4 Min Read
Advertisement Carousel

छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उसकी जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने की मांग उठी है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में बदलाव समय की जरूरत है। उनका मानना है कि धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

मुख्य अपडेट

  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजा गया।
  • मदरसा बोर्ड की जगह नया प्राधिकरण बनाने का सुझाव।
  • उत्तराखंड मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई।
  • आधुनिक शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षा पर जोर।
  • मदरसों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात कही गई।

छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड में बदलाव की मांग क्यों उठी?

डॉ. सलीम राज ने पत्र में कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई मदरसों में आधुनिक शिक्षा का पर्याप्त समावेश नहीं है। उनके अनुसार विद्यार्थियों को दीनी तालीम मिलती है, लेकिन विज्ञान, कंप्यूटर और रोजगार आधारित शिक्षा का दायरा सीमित है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार हर वर्ष अनुदान देती है। इसके बावजूद आधुनिक शिक्षा का लाभ अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहा। इसलिए शिक्षा व्यवस्था में सुधार जरूरी है।

उत्तराखंड मॉडल से क्या सीख लेने की बात कही गई?

पत्र में उत्तराखंड सरकार के फैसले का उल्लेख किया गया है। वहां मदरसा शिक्षा परिषद की जगह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया गया है। डॉ. सलीम राज का सुझाव है कि इसी प्रकार का मॉडल छत्तीसगढ़ में भी लागू किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों के एक हाथ में धार्मिक शिक्षा और दूसरे हाथ में आधुनिक तकनीकी ज्ञान होगा। इससे भविष्य में उनके लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ सकते हैं।

प्रमुख सुझाव एक नजर में

  • मदरसा बोर्ड की जगह नया प्राधिकरण बनाया जाए।
  • आधुनिक विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।
  • कंप्यूटर शिक्षा को अनिवार्य बनाया जाए।
  • विद्यालयी शिक्षा परिषद से मदरसों को जोड़ा जाए।
  • पाठ्यक्रम तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाए।

प्रदेश के मदरसों की स्थिति पर भी जताई चिंता

पत्र में बताया गया कि राज्य में लगभग 418 मदरसे संचालित हैं। इनमें कुछ छात्रविहीन हैं, जबकि कुछ को ही उच्च स्तर तक मान्यता प्राप्त है। कई संस्थानों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के अनुरूप पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं है।

इसी कारण डॉ. सलीम राज ने छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड की मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उनका कहना है कि इससे विद्यार्थियों का भविष्य अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकता है।

आधुनिक शिक्षा से क्या होगा फायदा?

उन्होंने सुझाव दिया कि धार्मिक शिक्षा के साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर और कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया जाए। इससे छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

साथ ही मदरसों के विद्यार्थियों को मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इससे उनका समग्र विकास भी संभव होगा।

आगे क्या होगा?

फिलहाल यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है। अब इस पर अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है। यदि सरकार इस दिशा में पहल करती है तो छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड की व्यवस्था में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सभी पक्ष सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।

Share This Article
Leave a comment