अबूझमाड़ में कॉफी उत्पादन की तैयारी शुरू हो गई है। जिला प्रशासन ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए नई योजना बनाई है।
कॉफी बोर्ड के विशेषज्ञों ने कई गांवों का निरीक्षण किया। उन्होंने मिट्टी, जलवायु और वर्षा का वैज्ञानिक अध्ययन भी किया।
मुख्य बातें
- कॉफी बोर्ड ने क्षेत्र का विस्तृत सर्वे किया।
- प्राकृतिक वातावरण को उपयुक्त माना गया।
- ग्रामीणों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
- स्व-सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ेगी।
- अधिकारी कोरापुट में प्रशिक्षण लेंगे।
- भविष्य में चाय की खेती पर भी काम होगा।
कॉफी उत्पादन के लिए अनुकूल मिला क्षेत्र
विशेषज्ञों ने बताया कि अबूझमाड़ की जलवायु काफी अनुकूल है। यहां कॉफी आधारित कृषि वानिकी मॉडल विकसित किया जा सकता है।
इस मॉडल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ग्रामीणों की आय में सुधार होगा।
कॉफी उत्पादन से मिलेगी स्थायी कमाई
कॉफी उत्पादन शुरू होने में लगभग चार वर्ष लगेंगे। इसके बाद किसानों को लंबे समय तक नियमित आय मिलेगी।
परियोजना के पहले चरण में भूमि का चयन होगा। स्थानीय स्तर पर नर्सरी भी विकसित की जाएगी।
ग्रामीण परिवारों को सीधे इस योजना से जोड़ा जाएगा। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
योजना की प्रमुख विशेषताएं
- स्थानीय नर्सरी स्थापित की जाएगी।
- किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण मिलेगा।
- कृषि अधिकारियों को आधुनिक तकनीक सिखाई जाएगी।
- पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान रहेगा।
- कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
कोरापुट में सीखेंगे आधुनिक तकनीक
कॉफी बोर्ड की सलाह पर अधिकारियों को कोरापुट भेजा जाएगा। वहां वे उत्पादन और पौध प्रबंधन का प्रशिक्षण लेंगे।
प्रशिक्षण के बाद अधिकारी स्थानीय किसानों का मार्गदर्शन करेंगे। इससे योजना का बेहतर क्रियान्वयन होगा।
भविष्य में चाय की भी संभावना
कॉफी उत्पादन की सफलता के बाद चाय की खेती पर भी काम होगा। प्रशासन चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार करेगा।
इस पहल से अबूझमाड़ में टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

