केंद्र सरकार के सोशल मीडिया नोटिस ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। WhatsApp, Telegram, Signal और Instagram को अलग-अलग कारणों से नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार का कहना है कि कुछ फीचर्स और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था साइबर अपराध, फर्जी पहचान और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में कंपनियों से जवाब और सुधारात्मक कदमों की जानकारी मांगी गई है।
मुख्य अपडेट
- WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर सरकार ने जताई आपत्ति।
- Telegram और Signal से सुरक्षा उपायों पर स्पष्टीकरण मांगा गया।
- Instagram की विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया जांच के दायरे में आई।
- पायरेटेड कंटेंट को लेकर Telegram को अलग नोटिस मिला।
- जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
सोशल मीडिया नोटिस की वजह क्या है?
सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नए फीचर्स के साथ सुरक्षा मानकों को भी मजबूत होना चाहिए। खासकर ऐसे फीचर्स, जिनसे यूजर अपनी पहचान छिपाकर दूसरे लोगों से संपर्क कर सकते हैं।
इसी कारण सोशल मीडिया नोटिस जारी कर कंपनियों से पूछा गया है कि वे साइबर फ्रॉड, फर्जी पहचान और ऑनलाइन अपराध रोकने के लिए कौन-कौन से सुरक्षा उपाय अपना रही हैं।
WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर क्यों उठे सवाल?
WhatsApp एक ऐसे फीचर पर काम कर रहा है, जिसमें फोन नंबर साझा किए बिना केवल यूजरनेम के माध्यम से बातचीत की जा सकेगी।
सरकार का मानना है कि यदि इस सुविधा का दुरुपयोग हुआ तो साइबर अपराधी सरकारी अधिकारियों, बैंकों या आम लोगों के नाम से मिलते-जुलते यूजरनेम बनाकर धोखाधड़ी कर सकते हैं। इसी कारण फिलहाल इस फीचर को लेकर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
Telegram और Instagram पर क्या हैं आरोप?
Telegram को दो अलग-अलग मामलों में नोटिस मिला है। पहला यूजरनेम आधारित मैसेजिंग से जुड़ा है। दूसरा प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर पायरेटेड फिल्मों और ओटीटी कंटेंट के प्रसार को लेकर है।
वहीं Instagram की पैरेंट कंपनी Meta से विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया पर जवाब मांगा गया है। जांच में कुछ ऐसे विज्ञापनों की जानकारी सामने आई, जो कथित रूप से अवैध गतिविधियों से जुड़े बाहरी चैनलों की ओर यूजर्स को भेज रहे थे।
कंपनियों ने क्या सफाई दी?
WhatsApp ने कहा है कि उसका नया फीचर अभी लॉन्च नहीं हुआ है। कंपनी के अनुसार इसमें कई सुरक्षा लेयर जोड़ी जाएंगी। फर्जी अकाउंट रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी लागू होगी।
Meta ने कहा कि उसकी नीति अवैध और आपत्तिजनक कंटेंट के प्रति पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की है। कंपनी ने संबंधित विज्ञापन और अकाउंट हटाने की जानकारी भी साझा की।
हालांकि Telegram और Signal की ओर से फिलहाल सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एक नजर में
- चार बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सरकार के रडार पर।
- साइबर फ्रॉड और इम्पर्सोनेशन मुख्य चिंता।
- Telegram पर पायरेसी का भी आरोप।
- Meta ने सुरक्षा उपाय मजबूत होने का दावा किया।
- जवाब के बाद सरकार आगे का फैसला करेगी।
क्या आगे कानूनी कार्रवाई संभव है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कंपनियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, तो सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि सुरक्षा मानकों को लेकर संतुष्टि नहीं मिलने पर WhatsApp के यूजरनेम फीचर की अनुमति रोकी जा सकती है। वहीं Telegram के मामले में कॉपीराइट कानून के तहत भी कार्रवाई संभव है।
विशेषज्ञों की राय क्यों बंटी हुई है?
कुछ साइबर विशेषज्ञ सरकार के कदम को डिजिटल सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्त निगरानी आवश्यक है।
दूसरी ओर डिजिटल अधिकार संगठनों का तर्क है कि किसी फीचर को लॉन्च से पहले रोकने का स्पष्ट कानूनी आधार होना चाहिए। इसलिए उन्होंने नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

