टमाटर की कीमत में 31% उछाल: CRISIL रिपोर्ट ने बढ़ते रसोई खर्च को लेकर दी चेतावनी

CG DARSHAN
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टमाटर की कीमत में तेज उछाल ने आम परिवारों की रसोई का बजट प्रभावित करना शुरू कर दिया है। CRISIL इंटेलिजेंस की ‘रोटी-राइस रिपोर्ट’ के मुताबिक, टमाटर, रसोई गैस (LPG) और वनस्पति तेल की बढ़ती कीमतों के कारण घर पर भोजन तैयार करने की लागत लगातार बढ़ रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में शाकाहारी थाली की लागत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत बढ़ी। वहीं, मांसाहारी थाली बनाने का खर्च 6 प्रतिशत तक बढ़ गया।

 

मुख्य बातें

  • टमाटर की कीमत में सालाना 31% की बढ़ोतरी।
  • शाकाहारी थाली 5% महंगी हुई।
  • मांसाहारी थाली की लागत 6% बढ़ी।
  • LPG और खाद्य तेल करीब 10% महंगे हुए।
  • आलू के दाम घटने से सीमित राहत मिली।
  • चिकन की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

 

आखिर टमाटर इतने महंगे क्यों हुए?

टमाटर की कीमत बढ़ने का मुख्य कारण इस साल फरवरी और मार्च के दौरान अधिक तापमान को माना गया है। गर्मी के कारण फसल की बुवाई प्रभावित हुई, जिससे उत्पादन कम हुआ और बाजार में आपूर्ति घट गई।

इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ा। इससे खाद्य तेल और LPG की कीमतों में भी करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

 

मांसाहारी थाली पर भी पड़ा असर

CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार टमाटर की कीमत बढ़ने के साथ-साथ चिकन की कीमतों में भी इजाफा हुआ। अत्यधिक गर्मी के कारण पोल्ट्री फार्मों में उत्पादन प्रभावित हुआ। इससे ब्रॉयलर की उपलब्धता कम हुई और बाजार में चिकन महंगा हो गया।

रिपोर्ट के मुताबिक मांसाहारी थाली की कुल लागत का लगभग आधा हिस्सा चिकन पर निर्भर करता है। ऐसे में चिकन महंगा होने से कुल खर्च भी बढ़ गया।

 

क्या आने वाले महीनों में मिलेगी राहत?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून सामान्य रहता है और सब्जियों की नई फसल समय पर बाजार में पहुंचती है, तो टमाटर की कीमत में कुछ नरमी आ सकती है।

हालांकि यदि LPG, खाद्य तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो घरेलू रसोई का खर्च अभी भी दबाव में रह सकता है।

 

आम परिवारों पर क्या होगा असर?

लगातार बढ़ रही टमाटर की कीमत का असर सीधे मासिक बजट पर दिखाई दे सकता है। मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को भोजन पर पहले से अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

यदि आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तो आने वाले महीनों में घरेलू खर्च और बढ़ने की संभावना बनी रहेगी।

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