मोदी-अल्बानीज बैठक के बाद भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई दिशा

CG DARSHAN
CG DARSHAN 3 Min Read
3 Min Read
Advertisement Carousel

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए नए द्विपक्षीय समझौतों ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को नई गति दी है। भारत ऑस्ट्रेलिया समझौते के तहत सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। दोनों देशों ने भविष्य की चुनौतियों का संयुक्त रूप से सामना करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।

मुख्य बातें

  • यूरेनियम आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण सहमति।
  • रक्षा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ेगा।
  • साइबर सुरक्षा के लिए साझा रोडमैप तैयार।
  • क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
  • CECA को आगे बढ़ाने पर दोनों देशों की सहमति।

भारत ऑस्ट्रेलिया समझौते से ऊर्जा और सुरक्षा क्षेत्र को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज के बीच हुई वार्ता में ऊर्जा और सुरक्षा सबसे प्रमुख विषय रहे। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी समझौते से भारत को ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम की व्यावसायिक आपूर्ति आसान होने की संभावना है। इससे देश की परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को नई गति मिलने के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

दोनों नेताओं ने रक्षा क्षेत्र में नवाचार को बढ़ाने के लिए डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर विकसित करने का भी निर्णय लिया। इसके माध्यम से रक्षा उद्योगों और स्टार्टअप के बीच सहयोग मजबूत किया जाएगा।

तकनीक और आर्थिक सहयोग पर भी बढ़ा फोकस

बैठक में साइबर सुरक्षा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी और वैश्विक सप्लाई चेन को लेकर भी नई पहल की घोषणा की गई। दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त रणनीति अपनाने पर सहमति जताई। इससे स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

इसके अलावा व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द अंतिम रूप देने पर भी चर्चा हुई। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में नई तेजी आ सकती है।

भारत ऑस्ट्रेलिया समझौते से इंडो-पैसिफिक में सहयोग होगा मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मिलकर काम करेंगे। समुद्री सुरक्षा, जहाज निर्माण और रखरखाव के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रयासों को और मजबूत करने पर बल दिया। साथ ही वैश्विक तनाव और संघर्षों का समाधान संवाद तथा कूटनीति के माध्यम से निकालने की आवश्यकता पर भी सहमति व्यक्त की।

एक नजर में

  • यूरेनियम आपूर्ति का मार्ग होगा आसान।
  • डिफेंस इनोवेशन कॉरिडोर को बढ़ावा।
  • समुद्री सुरक्षा पर संयुक्त रोडमैप।
  • साइबर सुरक्षा और तकनीकी सहयोग मजबूत।
  • व्यापार और निवेश बढ़ाने पर सहमति।

Share This Article
Leave a comment