खेल मंत्रालय ने भारतीय जूडो महासंघ की अंतरिम कार्यकारी समिति को तत्काल प्रभाव से सशर्त मान्यता प्रदान कर दी है। यह फैसला दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद गठित नई समिति के चुनाव के आधार पर लिया गया। हालांकि मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह मान्यता अदालत में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी।
अदालत के आदेश के बाद बनी नई कार्यकारी समिति
दिल्ली उच्च न्यायालय ने फरवरी में महासंघ को वार्षिक आम बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया था। साथ ही राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप व्यवस्था लागू करने को कहा था। इसके बाद अंतरिम कार्यकारी समिति का गठन किया गया। समिति में अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों का चुनाव भी कराया गया।
भारतीय जूडो महासंघ को किन शर्तों का करना होगा पालन?
मंत्रालय ने साफ कहा कि यदि भारतीय जूडो महासंघ अदालत के निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसकी मान्यता वापस ली जा सकती है। इसके अलावा किसी भी गंभीर अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई संभव होगी। इसलिए अंतरिम समिति को समयबद्ध तरीके से सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
संविधान संशोधन और अंतिम चुनाव पर रहेगा जोर
मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि महासंघ अपने संविधान में राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप संशोधन करे। इसके अलावा अंतिम कार्यकारी समिति के चुनाव भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराए जाएं। वहीं अदालत के आदेशों के अनुपालन की मासिक रिपोर्ट भी मंत्रालय को भेजनी होगी।
खेल प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय खेल संघों में बेहतर प्रशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि सभी शर्तों का पालन होता है, तो भारतीय जूडो महासंघ भविष्य में नियमित गतिविधियों और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारियों पर अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा।
एक नजर में
- अंतरिम कार्यकारी समिति को मिली सशर्त मान्यता।
- अदालत के आदेशों का पालन अनिवार्य।
- संविधान संशोधन की समय सीमा तय।
- अंतिम चुनाव कराने का निर्देश।
- मासिक अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी।
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