श्रावण मास के आगमन से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सपत्नीक कौशल्या साय के साथ भोरमदेव धाम पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की। साथ ही मंदिर की परिक्रमा कर प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और जनकल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में भी सहभागिता की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करती हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
भोरमदेव धाम की सांस्कृतिक पहचान पर मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भोरमदेव धाम छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक है। यहां होने वाले धार्मिक अनुष्ठान समाज में लोककल्याण, सद्भाव और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देते हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इससे धार्मिक पर्यटन को भी नई गति मिल रही है।
भोरमदेव धाम में कांवड़ यात्रियों का होगा स्वागत
मुख्यमंत्री ने बताया कि 30 जुलाई से भगवान शिव का पवित्र श्रावण मास प्रारंभ होगा। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों की तरह इस बार भी वे भोरमदेव धाम पहुंचने वाले कांवड़ यात्रियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और सामाजिक एकता की जीवंत परंपरा है। श्रद्धालुओं का सम्मान करना सभी के लिए सौभाग्य की बात है।
महाअनुष्ठान में वैदिक परंपरा का हुआ पालन
श्री महादिव्य देशम फाउंडेशन के तत्वावधान में 25 जुलाई से पंच दिवसीय महा चतुर शुद्धि सहस्र कलशम् महाअनुष्ठान आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य मंदिरों के शुद्धिकरण, दिव्य ऊर्जा के पुनर्संचार और प्रदेश की समृद्धि की कामना करना है।
फाउंडेशन के प्रमुख राजीव राकुल स्वामी के अनुसार यह अनुष्ठान भगवान परशुराम स्रोतम और आगम शास्त्रों में वर्णित वैदिक विधियों के अनुसार संपन्न कराया जा रहा है। भोरमदेव धाम में आयोजित इस कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, वैदिक आचार्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
प्रमुख अपडेट
- भगवान भोलेनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
- प्रदेश के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
- पंच दिवसीय महाअनुष्ठान में शामिल हुए।
- श्रावण मास में कांवड़ यात्रियों का स्वागत करेंगे।
- धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।

