भारत में विदेशी अंशदान से जुड़े कानून में प्रस्तावित FCRA बिल इन दिनों राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना हुआ है। सरकार का दावा है कि नए प्रावधान पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लाए गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष का कहना है कि इससे केंद्र सरकार के अधिकार बढ़ सकते हैं। अमेरिकी सांसदों की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा वैश्विक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
मुख्य बातें
- FCRA बिल संसद में विचाराधीन है।
- नए एफसीआरए नियम पहले ही लागू किए जा चुके हैं।
- सरकार ने पारदर्शिता बढ़ाने का दावा किया।
- विपक्ष ने कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए।
- विदेशी फंडिंग की निगरानी व्यवस्था और सख्त होगी।
FCRA बिल पर विवाद की वजह क्या है?
हाल ही में अमेरिका के रिपब्लिकन सांसद राइली मूर ने प्रस्तावित संशोधनों पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि इससे धार्मिक संस्थाओं के संचालन में सरकारी हस्तक्षेप बढ़ सकता है। हालांकि भारतीय नेताओं ने इसे देश का आंतरिक विषय बताया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि कुछ प्रस्तावित प्रावधानों के कारण पंजीकरण रद्द होने की स्थिति में संस्थाओं की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण का दायरा बढ़ सकता है। सरकार इन दावों को गलत बताते हुए केवल प्रशासनिक सुधार की बात कह रही है।
FCRA बिल में क्या-क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
सरकार ने संशोधन के जरिए कई नई व्यवस्थाएं प्रस्तावित की हैं।
- विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के लिए नामित प्राधिकारी नियुक्त होगा।
- धार्मिक स्थलों की मूल पहचान सुरक्षित रखने का प्रावधान रहेगा।
- प्रभावित संस्थाओं को अपील का अधिकार मिलेगा।
- समय पर नवीनीकरण नहीं होने पर पंजीकरण स्वतः समाप्त होगा।
- कुछ मामलों में अधिकतम सजा घटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
- राज्य एजेंसियों को जांच से पहले केंद्र की मंजूरी लेनी होगी।
सरकार का कहना है कि इन बदलावों से कानून की मूल भावना प्रभावित नहीं होगी।
लागू हो चुके नए नियम क्या कहते हैं?
नए नियमों के अनुसार प्रत्येक संस्था को विदेशी अंशदान का उद्देश्य और कार्यक्षेत्र स्पष्ट करना होगा। इसके अलावा वार्षिक रिपोर्ट में परियोजना-वार खर्च का विवरण देना अनिवार्य होगा।
संस्थाओं को वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों की जानकारी भी देनी होगी। यदि विदेशी धन किसी अन्य संस्था के माध्यम से मिला है, तब भी अंतिम दानदाता का विवरण देना आवश्यक रहेगा।
इसके साथ ही पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए पिछले दो वर्षों में न्यूनतम 10 लाख रुपये के विदेशी अंशदान के उपयोग का प्रमाण भी देना होगा।
विदेशी फंडिंग कानून के मौजूदा नियम
भारत में कोई भी पात्र संस्था विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए एफसीआरए पंजीकरण या पूर्व अनुमति लेती है। विदेशी धन पहले निर्धारित बैंक खाते में जमा होता है। इसके बाद उसका उपयोग तय नियमों के अनुसार किया जाता है।
हर वर्ष संस्था को ऑडिट रिपोर्ट, विदेशी दानदाताओं की जानकारी और खर्च का पूरा विवरण गृह मंत्रालय को देना होता है।
एक नजर में महत्वपूर्ण आंकड़े
- वर्ष 2024-25 में लगभग 16,200 संस्थाओं को विदेशी अंशदान मिला।
- कुल विदेशी अंशदान लगभग 22,963 करोड़ रुपये रहा।
- पिछले दस वर्षों में करीब 22,000 पंजीकरण रद्द हुए।
- लगभग 15,000 पंजीकरण समय पूरा होने के बाद समाप्त हुए।
- प्रशासनिक खर्च की अधिकतम सीमा 20 प्रतिशत निर्धारित है।
सरकार का पक्ष क्या है?
सरकार के अनुसार FCRA बिल का उद्देश्य विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधान प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मजबूत करेंगे और कानून के मूल ढांचे में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

