कश्मीर के पुलवामा जिले के युवा फाइटर ओवैस याकूब ने बुल्गारिया में आयोजित BRAVE CF 107 प्रतियोगिता जीतकर भारत को बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाई। सीमित संसाधनों से शुरू हुआ उनका सफर अब दुनिया के बड़े MMA मंच तक पहुंच चुका है। यह उपलब्धि उनके संघर्ष, अनुशासन और लगातार मेहनत का परिणाम है।
कैटरिंग से लेकर अंतरराष्ट्रीय चैंपियन बनने तक का सफर
पुलवामा के मूरान कस्बे के रहने वाले ओवैस साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। पिता की तबीयत खराब होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उन्होंने कैटरिंग, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव और ट्रेनर के रूप में काम किया। इसके अलावा उन्होंने सेब के बागानों में फल तोड़ने और पैकिंग का काम भी किया।
इन सब जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने मार्शल आर्ट्स का अभ्यास नहीं छोड़ा। ओवैस याकूब ने कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाया और लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे।
BRAVE CF 107 में भारत का बढ़ाया सम्मान
बुल्गारिया में खेले गए BRAVE CF 107 टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम किया। जीत के बाद उन्होंने पारंपरिक कश्मीरी काराकुली टोपी और कुर्ता पहनकर अपनी मातृभूमि को सम्मान दिया।
दिल्ली लौटने पर एयरपोर्ट पर लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी प्रतिक्रिया की उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। ओवैस याकूब की इस उपलब्धि की पूरे देश में सराहना हुई।
खबीब की टीम के साथ मिली नई पहचान
साल 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर सफलता मिलने के बाद उन्हें टीम खबीब के साथ ट्रेनिंग का अवसर मिला। उन्होंने अमेरिकन किकबॉक्सिंग एकेडमी में दिग्गज फाइटर खबीब नूरमागोमेदोव और कोच जेवियर मेंडेज के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया।
इस अनुभव ने उनके खेल को नई ऊंचाई दी। इसके बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार दमदार प्रदर्शन करना शुरू किया।
युवाओं को तैयार कर रही उनकी MMA एकेडमी
साल 2015 में उन्होंने पुलवामा में अपनी MMA एकेडमी की शुरुआत की। यहां स्थानीय युवाओं को आधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षण दिया जाता है। अब तक 200 से अधिक खिलाड़ी इस एकेडमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
ओवैस याकूब का मानना है कि खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देता है। इसलिए वे खुद अभ्यास करने के साथ नई प्रतिभाओं को भी तैयार कर रहे हैं।
आगे भी देश के लिए जीतना है बड़ा खिताब
अंतरराष्ट्रीय सफलता के बावजूद उन्होंने स्थानीय प्रशासन से अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने की बात कही। हालांकि देशभर से मिले समर्थन ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया है।
अब उनका लक्ष्य आने वाले बड़े MMA टूर्नामेंट में भारत के लिए और अधिक खिताब जीतना है। ओवैस याकूब की प्रेरक यात्रा उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
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