आशीष यादव ने रचा विश्व एथलेटिक्स इतिहास

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भारत के युवा भालाफेंक खिलाड़ी आशीष यादव ने विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया। 19 वर्षीय खिलाड़ी ने 74.09 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंककर पोडियम पर जगह बनाई। इस उपलब्धि के साथ आशीष यादव नीरज चोपड़ा के बाद विश्व अंडर-20 स्तर पर भालाफेंक में पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। उनकी सफलता ने भारतीय एथलेटिक्स को नई उम्मीद दी है।

तीसरे प्रयास में दिलाया भारत को रजत

प्रतियोगिता की शुरुआत में मुकाबला बेहद कड़ा रहा। हालांकि तीसरे प्रयास में आशीष यादव ने 74.09 मीटर का शानदार थ्रो फेंका। यही प्रयास उनके लिए रजत पदक का आधार बना। उनका यह प्रदर्शन व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 74.49 मीटर से केवल 40 सेंटीमीटर कम रहा। इसके बावजूद विश्व मंच पर उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली माना गया।

नीरज चोपड़ा के बाद दर्ज कराया नाम

भारतीय भालाफेंक इतिहास में यह उपलब्धि बेहद खास मानी जा रही है। वर्ष 2016 में नीरज चोपड़ा ने विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। अब आशीष यादव ने रजत जीतकर उसी गौरवशाली सूची में अपनी जगह बना ली है। युवा खिलाड़ी का यह प्रदर्शन भविष्य के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

स्वर्ण और कांस्य पदक किसे मिला

दक्षिण अफ्रीका के जान हेंड्रिक हेमैंस ने 80.50 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता। डोमिनिका के एडिसन जेम्स ने 73.89 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भारत के टी. धरणीधरन ने 72.35 मीटर का थ्रो फेंककर छठा स्थान प्राप्त किया और टीम के लिए महत्वपूर्ण अंक जुटाए।

अन्य भारतीय खिलाड़ियों ने भी किया प्रभावित

विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में भारतीय खिलाड़ियों ने कई स्पर्धाओं में दमदार प्रदर्शन किया।

  • पूजा सिंह ने महिलाओं की ऊंची कूद के फाइनल में जगह बनाई।
  • शाहनवाज खान और जितिन अर्जुन लंबी कूद के फाइनल में पहुंचे।
  • टी. धरणीधरन भालाफेंक फाइनल में छठे स्थान पर रहे।
  • मोहम्मद अशफाक 400 मीटर फाइनल में आठवें स्थान पर रहे।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई उम्मीद

आशीष यादव की सफलता भारतीय एथलेटिक्स के लिए नई ऊर्जा लेकर आई है। लगातार उभरती युवा प्रतिभाएं अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आशीष यादव इसी तरह मेहनत जारी रखते हैं, तो आने वाले वर्षों में सीनियर स्तर पर भी भारत के लिए बड़े पदक जीत सकते हैं। उनकी यह उपलब्धि युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनने वाली है।

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