भारत की पैरालंपिक पदक विजेता और विश्व चैंपियन पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने खेलो इंडिया योजना की संशोधित व्यवस्था का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह पहल देश के पैरा खिलाड़ियों के लिए बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि यदि दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा समय रहते पहचानी जाए और उन्हें सही प्रशिक्षण मिले, तो भारत को भविष्य में कई नए अंतरराष्ट्रीय चैंपियन मिल सकते हैं।
खेलो इंडिया योजना से बढ़ेंगे पैरा खिलाड़ियों के अवसर
शीतल देवी ने कहा कि देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। चुनौती केवल सही अवसर और सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। उनके अनुसार, खेलो इंडिया योजना के माध्यम से गांवों और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग बच्चों तक खेल सुविधाएं पहुंचाई जा सकती हैं। इससे कई युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का सपना पूरा कर सकेंगे।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले से निकलकर विश्व मंच तक पहुंचने वाली शीतल देवी ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे कोच, भारतीय खेल प्राधिकरण और सरकार का सहयोग रहा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कहानी अपवाद नहीं होनी चाहिए। यदि खेलो इंडिया योजना का प्रभाव जमीनी स्तर तक पहुंचे, तो देश के हर जिले से प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ सकते हैं।
प्रतिभा खोज और आधुनिक प्रशिक्षण पर रहेगा जोर
संशोधित योजना में प्रतिभा की पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र, विशेषज्ञ कोच, खेल विज्ञान और बेहतर बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए 29,054 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। शीतल देवी का मानना है कि खेलो इंडिया योजना के इन प्रावधानों से पैरा खिलाड़ियों को नई दिशा मिलेगी।
घर के पास अकादमी मिलने से बढ़ेगा आत्मविश्वास
शीतल देवी ने कहा कि कई दिव्यांग बच्चे केवल इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि उनके आसपास गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण केंद्र नहीं होते। यदि स्थानीय स्तर पर अकादमियां और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध हों, तो परिवार भी बच्चों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए अधिक प्रेरित होंगे। इससे प्रतिभा को समय पर सही मंच मिलेगा।
नियमित प्रतियोगिताएं बनाएंगी मजबूत खिलाड़ी
उन्होंने खेलो इंडिया पैरा गेम्स के विस्तार का भी स्वागत किया। उनके अनुसार, लगातार प्रतियोगिताएं खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों को बेहतर बनाती हैं। खेलो इंडिया योजना के तहत अधिक प्रतियोगिताएं आयोजित होने से युवा खिलाड़ियों को अनुभव मिलेगा और वे अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए बेहतर तैयारी कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी योजना की वास्तविक सफलता तब होगी, जब गांवों में रहने वाला हर दिव्यांग बच्चा खेलों में अपना भविष्य देख सके।


