छत्तीसगढ़ में श्रमिक सुरक्षा को व्यापक बनाने के लिए सरकार ने कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इन प्रयासों में सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है। साथ ही शिक्षा, आवास और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का विस्तार हुआ है। श्रम विभाग ने सेवाओं को सरल बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग बढ़ाया है।
प्रदेश में श्रमिकों तक योजनाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया गया है। पांच नए जिलों में श्रम पदाधिकारी कार्यालय स्थापित किए गए हैं। वहीं पांच कार्यालयों को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय के रूप में उन्नत किया गया है।
मुख्य बातें
- प्रदेश में कुल 33 श्रम कार्यालय संचालित हैं।
- करीब 56.83 लाख श्रमिकों का पंजीयन हुआ है।
- 3.48 लाख श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ मिला।
- कल्याणकारी योजनाओं पर 173.32 करोड़ रुपये खर्च हुए।
- निर्माण श्रमिक आवास सहायता बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये हुई।
- 18 जिलों में 39 श्रम अन्न केंद्र संचालित हैं।
सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार
श्रम विभाग के अंतर्गत विभिन्न मंडलों के माध्यम से श्रमिकों का पंजीयन किया जा रहा है। इनमें संगठित, निर्माण और असंगठित क्षेत्र के श्रमिक शामिल हैं। अब तक लगभग 56.83 लाख श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं।
वर्ष 2026 में 30 जून तक 3.48 लाख श्रमिकों को योजनाओं का लाभ मिला। इनमें बीमा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल उन्नयन शामिल हैं। इन योजनाओं पर 173.32 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
आवास सहायता से आर्थिक राहत
निर्माण श्रमिकों के लिए आवास सहायता राशि में वृद्धि की गई है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना में राशि एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये की गई है। इससे पात्र श्रमिकों को घर बनाने या खरीदने में सहायता मिलेगी।
महिला निर्माण श्रमिकों के लिए भी स्वरोजगार को प्रोत्साहन दिया गया है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना में सहायता राशि बढ़ाई गई है। अब पात्र महिला श्रमिकों और उनके समूहों को डेढ़ लाख रुपये तक सहायता मिलेगी।
श्रमिक सुरक्षा के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य पर जोर
श्रमिक परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए नई पहल की गई है। अटल कैरियर निर्माण योजना के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग की सुविधा मिलेगी।
अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना के तहत पात्र निर्माण श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। कक्षा 6वीं से 12वीं तक उत्कृष्ट निजी आवासीय विद्यालयों में पढ़ाई का प्रावधान है। वर्ष 2026-27 से लाभार्थी बच्चों की संख्या 100 से बढ़ाकर 200 की गई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी विशेष योजना लागू की गई है। मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक स्वास्थ्य परीक्षण योजना से नियमित जांच की जाएगी। इससे स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान संभव होगी।
पांच रुपये में पौष्टिक भोजन
शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के तहत श्रमिकों को पांच रुपये में भोजन दिया जा रहा है। योजना के तहत गरम और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। वर्तमान में 18 जिलों में 39 भोजन केंद्र संचालित हैं।
निर्माण, संगठित और असंगठित श्रमिक इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इससे काम के दौरान किफायती भोजन की सुविधा उपलब्ध होती है।
डिजिटल माध्यम से आसान हुई सेवाएं
श्रम विभाग का ई-श्रम साथी मोबाइल एप सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिए श्रमिक स्वयं अपना पंजीयन कर सकते हैं। नियोजकों और श्रमिकों के बीच संपर्क की सुविधा भी उपलब्ध है।
रोजगार संबंधी जानकारी प्राप्त करने में भी यह मंच मददगार है। इससे विभागीय सेवाओं में पारदर्शिता और पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया गया है।
श्रमिक सुरक्षा के लिए सुरक्षित कार्यस्थल पर जोर
राज्य के विभिन्न कारखानों में श्रमिकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण उनके काम और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार होता है। वरिष्ठ अधिकारी और सुरक्षा अधिकारी प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल रहते हैं।
इस पहल का उद्देश्य सुरक्षा मानकों के पालन को मजबूत करना है। साथ ही कार्यस्थल दुर्घटनाओं में कमी लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
मॉडल लेबर चौक में मिलेंगी सुविधाएं
सरकार द्वारा मॉडल लेबर चौक फेसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। यहां श्रमिकों को पंजीयन और योजनाओं के आवेदन की सुविधा मिलेगी। भोजन, पेयजल और विश्राम की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
इन केंद्रों के माध्यम से श्रमिकों को अधिक व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराने का प्रयास है। इससे रोजगार की तलाश करने वाले श्रमिकों को भी सुविधा मिलेगी।
एक नजर में
- श्रम प्रशासन को जिला स्तर पर मजबूत किया गया।
- श्रम कार्यालयों की संख्या बढ़ाकर 33 की गई।
- श्रमिक पहचान पंजीयन प्रक्रिया को तेज किया गया।
- महिलाओं के रोजगार अवसरों को बढ़ावा दिया गया।
- शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाओं का विस्तार हुआ।
- डिजिटल सेवाओं के उपयोग को बढ़ाया गया।
मृत्यु और दिव्यांगता पर आर्थिक सहायता
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में संकट की स्थिति के लिए आर्थिक सहायता का प्रावधान है। सामान्य मृत्यु पर आश्रितों को एक लाख रुपये दिए जाते हैं। कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु होने पर पांच लाख रुपये की सहायता मिलती है।
स्थायी दिव्यांगता की स्थिति में 2.50 लाख रुपये तक सहायता दी जाती है। अपंजीकृत निर्माण श्रमिकों की कार्यस्थल दुर्घटना में मृत्यु पर भी सहायता का प्रावधान है।
असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के तहत पंजीकृत श्रमिक की मृत्यु पर एक लाख रुपये दिए जाते हैं। दिव्यांगता की स्थिति में 50 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध है।
कुल मिलाकर, श्रमिक सुरक्षा को सामाजिक और आर्थिक सहायता से जोड़ा गया है। सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य को भी योजनाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। आवास और स्वरोजगार से आर्थिक स्थिरता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
इसके अलावा डिजिटल सेवाओं ने पंजीयन और रोजगार संबंधी सुविधाओं को आसान बनाया है। मॉडल लेबर चौक जैसी पहलें सम्मानजनक कार्य वातावरण की दिशा में कदम हैं। इन प्रयासों से राज्य की श्रम व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।


