नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में स्थिति गंभीर कर दी है। इस आपदा के बीच नेपाल में बाढ़ से प्रभावित 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। विदेश मंत्रालय ने इसकी जानकारी साझा की है। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री भी शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, संचार व्यवस्था प्रभावित होने से संपर्क में परेशानी आ रही है। भारतीय अधिकारी लगातार संबंधित लोगों की जानकारी जुटा रहे हैं। वहीं, नेपाल में मौजूद भारतीय दूतावास भी सहायता कार्यों में जुटे हैं।
नेपाल में बाढ़ के बाद 288 भारतीयों से संपर्क नहीं
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारतीय नागरिकों की स्थिति पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कुल 288 भारतीयों से फिलहाल संपर्क नहीं हो पाया है।
इनमें 73 लोग त्रिशूली पावर प्रोजेक्ट से जुड़े हैं। इसके अलावा तमिलनाडु के 37 और 39 लोगों के दो समूह शामिल हैं। दोनों समूह कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल गए थे।
पश्चिम बंगाल के 32 तीर्थयात्री भी संपर्क से बाहर बताए गए हैं। वहीं, अलग-अलग राज्यों के 61 नागरिकों की भी जानकारी नहीं मिल सकी है। केरल के 33 लोगों का समूह भी प्रभावित लोगों में शामिल है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर भी पड़ा असर
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय यात्री भी आपदा के कारण प्रभावित हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, नेपाल में यात्रा कर रहे कई समूहों से संपर्क नहीं हो सका।
इसके अलावा करीब 200 तीर्थयात्रियों के चीन में फंसे होने की जानकारी दी गई है। भारत सरकार इन यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है।
तमिलनाडु के 21 लोग सुरक्षित बचाए गए
राहत अभियान के बीच एक सकारात्मक जानकारी भी सामने आई है। तमिलनाडु के 21 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इन लोगों को काठमांडू से नई दिल्ली लाने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक समन्वय किया जा रहा है।
भारत ने नेपाल भेजी 47 टन राहत सामग्री
नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने राहत सहायता बढ़ा दी है। भारत ने दो विमानों के जरिए नेपाल के लिए राहत सामग्री भेजी है।
पहले सी-130 जे विमान से 10 टन सामग्री भेजी गई। इसमें अस्थायी आश्रय और दवाइयां शामिल थीं। इसके बाद सी-17 विमान से 37 टन राहत सामग्री भेजी गई।
दूसरी खेप में आठ टन दवाइयां और एक टन खाद्य सामग्री शामिल बताई गई है। इस तरह दो दिनों में कुल 47 टन राहत सामग्री भेजी गई।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सहायता सामग्री नेपाल की जरूरत और मांग के आधार पर भेजी गई है।
राहत सहायता की प्रमुख जानकारी
- भारत ने दो विमानों से राहत सामग्री भेजी।
- नेपाल को कुल 47 टन सामग्री उपलब्ध कराई गई।
- दवाइयों को राहत सामग्री में प्राथमिकता दी गई।
- अस्थायी आश्रय की सामग्री भी भेजी गई।
- खाद्य सामग्री की खेप भी सहायता में शामिल रही।
दूतावासों ने शुरू की 24 घंटे हेल्पलाइन
बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में संचार व्यवस्था प्रभावित हुई है। इससे भारतीय नागरिकों से संपर्क करने में मुश्किल आ रही है।
विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। इसके अलावा नेपाल और बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास सक्रिय हैं।
दोनों दूतावास 24 घंटे हेल्पलाइन के जरिए लोगों की सहायता कर रहे हैं। मंत्रालय ने कहा है कि नई जानकारी मिलने पर संबंधित पक्षों को अपडेट दिया जाएगा।
एस जयशंकर ने की उच्चस्तरीय समीक्षा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी नेपाल में बाढ़ की स्थिति को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में विदेश सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजदूतों ने भी बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्रालय विभिन्न राज्य सरकारों और केंद्रीय मंत्रालयों के साथ समन्वय कर रहा है। टूर ऑपरेटरों और परियोजना से जुड़े अधिकारियों से भी जानकारी ली जा रही है।
नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क
भोटेकोसी नदी में अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई इलाके प्रभावित हुए हैं। ऐसे में भारतीय अधिकारी नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं।
नेपाल में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीयों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास जारी हैं। राहत और बचाव कार्यों के लिए भी जरूरी समन्वय किया जा रहा है।
एक नजर में मुख्य अपडेट
- 288 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है।
- कैलाश मानसरोवर यात्रा के कई समूह प्रभावित हैं।
- तमिलनाडु के 21 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है।
- भारत ने नेपाल को 47 टन राहत सामग्री भेजी है।
- भारत और नेपाल के अधिकारी लगातार संपर्क में हैं।
कुल मिलाकर, नेपाल में बाढ़ के बाद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास जारी हैं।


