नेपाल में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने बड़े क्षेत्र को प्रभावित किया। भूकंप के कुछ मिनट बाद ही तेज सैलाब की सूचना मिली। शुरुआती जानकारी में ग्लेशियर टूटने की आशंका जताई गई है। रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में बाढ़ का व्यापक असर देखा गया। कई सड़कें और पुल बहने से संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई।
नेपाल सरकार के अनुसार, तिब्बत क्षेत्र में सुबह 8.37 बजे भूकंप आया था। इसके करीब तीन मिनट बाद बाढ़ की सूचना मिली। विशेषज्ञों ने हिमनद झील के फटने की संभावना जताई है। ऐसी स्थिति में बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बहता है।
ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिरा
रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा अलग हुआ। इसका लगभग 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा। विशाल हिमखंड करीब 4,000 फीट नीचे नदी घाटी में पहुंचा।
इसके बाद ल्हेंडे खोला नदी में अचानक तेज बहाव पैदा हुआ। पानी आगे बढ़कर भोटेकोशी नदी में पहुंच गया। इससे निचले क्षेत्रों में बाढ़ का प्रभाव तेजी से बढ़ा। स्थानीय स्तर पर बचाव और राहत कार्य भी प्रभावित हुए।
100 मीटर ऊंची लहर जैसी थी बाढ़
स्थानीय अधिकारियों ने बाढ़ के तेज बहाव की जानकारी दी। उनके अनुसार, पानी की विशाल दीवार तिमुरे बाजार की ओर बढ़ी। इसे करीब 100 मीटर ऊंची लहर जैसा बताया गया। अचानक आए सैलाब से बाजार क्षेत्र में भारी नुकसान हुआ।
नेपाल बाढ़ से परिवहन ढांचा प्रभावित
नेपाल बाढ़ ने परिवहन व्यवस्था को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। अलग-अलग क्षेत्रों में 22 कंक्रीट पुल बहने की जानकारी है। पांच बेली पुलों के भी बहने की सूचना सामने आई है।
करीब 42 किलोमीटर सड़क भी बाढ़ के पानी में बह गई। इसके अलावा कई जलविद्युत परियोजनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इससे प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।
कई जिलों में फैला बाढ़ का पानी
बाढ़ का प्रभाव कई जिलों तक पहुंचा है। नुवाकोट, चितवन, गोरखा और तनहुं प्रभावित जिलों में शामिल हैं। नवलपरासी ईस्ट में भी बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी है।
सरकार ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग को तीन महीने के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्र घोषित किया है। प्रशासन राहत और आवश्यक सेवाएं बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
एक नजर में
- तिब्बत क्षेत्र में भूकंप के बाद बाढ़ की सूचना मिली।
- ग्लेशियर का करीब 2,000 फीट चौड़ा हिस्सा टूटने की बात सामने आई।
- बाढ़ की लहर करीब 100 मीटर ऊंची बताई गई।
- 22 कंक्रीट और पांच बेली पुल प्रभावित हुए।
- लगभग 42 किलोमीटर सड़क बहने की जानकारी है।
भारतीय पर्यटकों से संपर्क टूटा
आपदा के कारण कई भारतीय नागरिक प्रभावित हुए हैं। कोलकाता से कैलाश-मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यीय दल संपर्क से बाहर है। इसमें 30 पर्यटक और दो टूर प्रबंधक शामिल हैं।
दल 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था। बुधवार सुबह करीब 8.30 बजे दल रसुवागढ़ी पहुंचा था। इसके बाद अचानक बाढ़ आने से संपर्क टूट गया। संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण स्थिति की जानकारी जुटाना मुश्किल है।
टूर एजेंसी के अनुसार, दल के दोनों प्रबंधकों से सुबह करीब आठ बजे संपर्क हुआ था। इसके बाद किसी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। प्रभावित इलाके में हेलीकॉप्टर भेजे जाने की भी जानकारी सामने आई है।
केरल के 37 पर्यटक सुरक्षित
केरल के कन्नूर जिले के 37 लोग नेपाल में फंसे हैं। स्थानीय विधायक के अनुसार, सभी लोग सुरक्षित हैं। हालांकि, बाढ़ के कारण उनकी आगे की यात्रा रुक गई है।
राज्य सरकार को सभी पर्यटकों की जानकारी उपलब्ध करा दी गई है। उनकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। परिवारों को भी उनकी स्थिति के बारे में जानकारी दी गई है।
कई राज्यों ने हेल्पलाइन शुरू की
नेपाल बाढ़ के बाद कई राज्यों ने अपने नागरिकों की सहायता के लिए नियंत्रण कक्ष बनाए हैं। सरकारें प्रभावित लोगों की जानकारी जुटा रही हैं। साथ ही, केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय किया जा रहा है।
कर्नाटक ने नेपाल और तिब्बत में फंसे नागरिकों की जानकारी जुटानी शुरू की है। पश्चिम बंगाल सरकार भी प्रभावित यात्रियों के परिजनों के संपर्क में है। अन्य राज्यों ने भी सहायता नंबर जारी किए हैं।
प्रमुख हेल्पलाइन नंबर
- पश्चिम बंगाल: 033-24793311, 9147890181
- कोलकाता पुलिस: 18003455678, 9874902880
- केरल: 9447111844, 9737132147
- कर्नाटक: 1070, 080-22253707
- उत्तर प्रदेश: 1070
- महाराष्ट्र: 1070, +91-9321587143
- तेलंगाना: 9871999044, 9949351270, 9618597969
- राजस्थान: 1070, 112 और राज्य आपातकालीन नंबर
- ओडिशा: 011-23012807, 7428135044, 8527580245
- सिक्किम: 03592201145, 03592202461, 03592202256
भारत के नेपाल स्थित दूतावास ने भी प्रभावित नागरिकों के लिए सहायता नंबर जारी किए हैं। नागरिक +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 पर संपर्क कर सकते हैं। ये नंबर व्हाट्सऐप पर भी उपलब्ध बताए गए हैं।
राहत अभियान के सामने बड़ी चुनौतियां
नेपाल बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान कठिन परिस्थितियों में चल रहा है। सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच बाधित है। संचार व्यवस्था ठप होने से लोगों की स्थिति की पुष्टि भी चुनौतीपूर्ण है।
प्रशासन नुकसान का आकलन करने के साथ राहत कार्य आगे बढ़ा रहा है। वहीं, भारतीय राज्य सरकारें अपने नागरिकों की जानकारी जुटा रही हैं। स्थिति सामान्य होने के साथ नुकसान का विस्तृत आकलन सामने आने की उम्मीद है।


