एशियाई खेलों में भारत की कराटे टीम को लेकर नया विवाद सामने आया है। एशियाई चैंपियन अलीशा चौधरी बिना अपने निजी कोच के मुकाबले में उतरेंगी। महिला 55 किलोग्राम कुमिते वर्ग में उनका मुकाबला होगा। वहीं चेतन भट्ट 84 किलोग्राम वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। दोनों खिलाड़ियों के साथ कोच की जगह टीम लीडर भेजा जा रहा है।
कोच की जगह मैनेजर के साथ जाएगी टीम
भारतीय टीम के साथ आदिकेशवा पेरुमल को टीम लीडर के रूप में भेजा जा रहा है। हालांकि, टीम लीडर को मैट के पास कोच की भूमिका निभाने की अनुमति नहीं होगी। कराटे जैसे खेल में मुकाबले के दौरान कोच की भूमिका काफी अहम होती है।
कोच खिलाड़ी की तकनीक और रणनीति पर नजर रखता है। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर रिव्यू प्रक्रिया में भी मदद करता है। इसलिए बड़े अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में कोच की अनुपस्थिति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अलीशा चौधरी ने कोच विकास की मांगी मौजूदगी
अलीशा चौधरी ने भारतीय ओलंपिक संघ से अपने कोच विकास को साथ भेजने की मांग की थी। उनका कहना है कि टीम लीडर की तुलना में उन्हें अपने प्रशिक्षक की जरूरत अधिक है। वह लंबे समय से विकास के मार्गदर्शन में तैयारी कर रही हैं।
आईओए की ओर से बताया गया कि कोच का नाम एशियाई खेलों की लॉन्ग लिस्ट में शामिल नहीं था। इसी वजह से उनके साथ जाने की मंजूरी नहीं मिली। वहीं टीम लीडर को भेजे जाने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं।
एशियाई चैंपियन बनने के बाद बढ़ी उम्मीद
इस साल बाली में आयोजित एशियाई सीनियर कराटे चैंपियनशिप में अलीशा चौधरी ने स्वर्ण पदक जीता। इससे एशियाई खेलों में उनसे पदक की उम्मीद बढ़ी है। वह महिला 55 किलोग्राम कुमिते वर्ग में भारत की प्रमुख दावेदार हैं।
कराटे की टीम की एशियाड भागीदारी पर पहले भी संशय रहा था। महासंघ से जुड़े विवाद के कारण टीम का जाना तय नहीं था। बाद में हस्तक्षेप के बाद अलीशा और चेतन भट्ट को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की मंजूरी मिली।
इस्तांबुल में हुई एशियाड की तैयारी
एशियाई खेलों की तैयारी के लिए अलीशा चौधरी ने अपने कोच के साथ इस्तांबुल में प्रशिक्षण किया। यह तैयारी 20 अगस्त से 3 सितंबर तक चली। इस दौरान तकनीक के साथ वजन प्रबंधन पर भी काम किया गया।
कोच की भूमिका मुकाबले के दौरान भी महत्वपूर्ण रहती है। खासकर वजन वाले वर्गों में खिलाड़ी की तैयारी पर लगातार नजर रखनी होती है। इसके अलावा मुकाबले के बीच रणनीति में बदलाव भी जरूरी हो सकता है।
कराटे टीम से जुड़ी प्रमुख चुनौतियां
- खिलाड़ियों को मुकाबले के दौरान विशेषज्ञ तकनीकी सलाह नहीं मिलेगी।
- मैट के पास रिव्यू प्रक्रिया में कोच की मदद उपलब्ध नहीं होगी।
- वजन प्रबंधन की जिम्मेदारी खिलाड़ी पर अधिक रह सकती है।
- रणनीतिक बदलाव के लिए टीम को सीमित विकल्प मिलेंगे।
एशियाई खेलों में भारतीय कराटे की उम्मीद
- अलीशा 55 किलोग्राम महिला कुमिते में उतरेंगी।
- चेतन भट्ट 84 किलोग्राम पुरुष वर्ग में चुनौती देंगे।
- दोनों खिलाड़ियों का नाम भारतीय दल में शामिल है।
- कराटे में भारत को पदक की उम्मीद है।
अब निगाहें अलीशा चौधरी के एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर रहेंगी। एशियाई चैंपियन होने के कारण उन पर उम्मीदों का दबाव भी होगा। हालांकि, बिना निजी कोच के उतरना उनके लिए अतिरिक्त चुनौती है। इसके बावजूद भारतीय कराटे दल पदक जीतने की कोशिश करेगा।
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