छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल

CG DARSHAN
CG DARSHAN 4 Min Read
4 Min Read
Advertisement Carousel

आठवीं अनुसूची को लेकर बढ़ी पहल

रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका से छत्तीसगढ़ी भाषाविदों ने मुलाकात की। इस दौरान भाषा के संरक्षण और विकास पर चर्चा हुई। साथ ही, इसे संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने का मुद्दा भी उठा।

भाषाविदों ने राज्यपाल को भाषा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जानकारी दी। उन्होंने इसके साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश से जुड़े कार्यों को भी बताया। उनके अनुसार, प्रदेश में इसका व्यापक स्तर पर प्रयोग होता है।

छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए बनेगी समिति

राज्यपाल ने इस विषय पर सकारात्मक पहल करने की बात कही। उन्होंने समिति के गठन की दिशा में कदम उठाने की जानकारी दी। समिति भाषा से जुड़ी महत्वपूर्ण सामग्री को व्यवस्थित रूप से संकलित करेगी।

इसमें इतिहास, साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, संदर्भ सामग्री भी एकत्र की जाएगी। विशेषज्ञों और विद्वानों से सुझाव लेने की प्रक्रिया भी होगी।

राज्यपाल ने असमिया और बोडो भाषाओं का उदाहरण भी सामने रखा। इन भाषाओं को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा चुका है।

समृद्ध साहित्यिक परंपरा पर जोर

भाषाविदों ने बताया कि छत्तीसगढ़ी में लंबे समय से साहित्य सृजन होता रहा है। इसके साहित्य की परंपरा 15वीं शताब्दी तक जाती है। कविता से लेकर पत्रकारिता तक कई विधाओं में रचनाएं उपलब्ध हैं।

छत्तीसगढ़ी भाषा में कविता, खंडकाव्य, कहानी और उपन्यास लिखे गए हैं। नाटक और आलोचना सहित अन्य विधाओं में भी पर्याप्त साहित्य मौजूद है।

इतिहास और शिक्षा में भी मजबूत आधार

भाषाविदों के अनुसार, इसका व्याकरण 1890 में तैयार किया गया था। पहला शब्दकोश 1939 में तैयार होने की जानकारी दी गई। वहीं, 1924 में ‘हीरू के कहिनी’ नामक पहला उपन्यास प्रकाशित हुआ।

पंडित सुंदरलाल शर्मा ने जेल से हस्तलिखित ‘दुलरवा’ पत्रिका भी प्रकाशित की थी। यह भाषा की साहित्यिक यात्रा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है।

वर्तमान में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में इसका अध्ययन कराया जा रहा है। स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर विद्यार्थी इसे पढ़ रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल पाठ्यक्रम में भी इसे शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है।

संरक्षण और विकास की दिशा में कदम

छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण को लेकर समिति का गठन महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे उपलब्ध ऐतिहासिक और साहित्यिक सामग्री को एक जगह संकलित किया जा सकेगा।

इसके अलावा, मानकीकरण और संदर्भ सामग्री तैयार करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों की भागीदारी से प्रस्ताव को अधिक व्यवस्थित आधार मिल सकता है।

एक नजर में

  • मुलाकात का स्थान: लोक भवन, रायपुर
  • प्रमुख विषय: आठवीं अनुसूची में शामिल करने की पहल
  • प्रस्तावित कदम: समिति का गठन
  • संकलन: इतिहास, साहित्य, व्याकरण और शब्दकोश
  • शिक्षा: विश्वविद्यालयों में अध्ययन जारी
  • स्कूल स्तर: कक्षा 1 से 8 तक पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया

बैठक में ये लोग रहे मौजूद

बैठक में भाषाविद् डॉ. चित्ररंजन कर और डॉ. सुधीर शर्मा उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ी साहित्यकार शीलकांत पाठक और अर्चना पाठक भी मौजूद थीं।

कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ी भाषा को संवैधानिक पहचान दिलाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति के माध्यम से भाषा से जुड़े प्रमाण और संदर्भ सामग्री जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

 

यह भी पढ़ें: रायपुर : सोशल मीडिया की ताकत से दुनिया तक पहुंचेगी धमतरी की खूबसूरती

Share This Article
Leave a comment