भूपेन हजारिका स्मृति समारोह में गूंजे कालजयी गीत, रायपुर में कलाकारों ने दी प्रस्तुति

CG DARSHAN
CG DARSHAN 4 Min Read
4 Min Read
Advertisement Carousel

रायपुर स्थित लोक भवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में मंगलवार को भूपेन हजारिका स्मृति समारोह का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत रत्न डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर हुआ। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय कार्यक्रम में मौजूद रहे।

आयोजन के दौरान डॉ. हजारिका के संगीत और कला योगदान को याद किया गया। कलाकारों ने उनकी रचनाओं को अलग-अलग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए मंच पर उतारा।

संगीत में दिखाई दी सामाजिक चेतना

राज्यपाल रमेन डेका ने डॉ. हजारिका के संगीत को समाज से जुड़ा माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि उनकी रचनाओं में प्रकृति और संस्कृति की गहरी छाप थी।

उनके गीत मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को सामने रखते थे। साथ ही, उनकी रचनाओं में राष्ट्रीय एकता और भाईचारे की भावना भी दिखाई देती है।

राज्यपाल ने कहा कि डॉ. हजारिका ने अपनी कला के माध्यम से देश की विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने का प्रयास किया। उनकी रचनाएं आज भी समाज को सकारात्मक संदेश देती हैं।

भूपेन हजारिका स्मृति समारोह में विशेष प्रस्तुतियां

कार्यक्रम में इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के कलाकारों ने नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। इसमें डॉ. हजारिका के जीवन और उनकी रचनात्मक यात्रा को केंद्र में रखा गया।

कलाकारों ने नृत्य और अभिनय के माध्यम से उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया। वहीं, महाकालीबाड़ी एवं विश्वनाथ मंदिर समिति, पंडरी के कलाकारों ने उनके प्रसिद्ध गीत गाए।

इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग प्रदान किया। दर्शकों ने गीत और नृत्य के माध्यम से महान कलाकार की रचनात्मक विरासत को करीब से महसूस किया।

कलाकारों की प्रस्तुति को मिली सराहना

भूपेन हजारिका स्मृति समारोह में प्रस्तुतियों के बाद राज्यपाल रमेन डेका ने कलाकारों की सराहना की। उन्होंने कलाकारों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

डॉ. हजारिका बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने संगीत, गायन, गीत लेखन और फिल्म निर्माण में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। इसलिए उनकी रचनाएं भारतीय सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती हैं।

जन्मशताब्दी वर्ष में याद की गई विरासत

जन्मशताब्दी वर्ष का यह आयोजन डॉ. हजारिका के योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बना। उनके गीतों में सामाजिक सरोकार और मानवीय मूल्यों की मजबूत उपस्थिति रही।

इसके अलावा, उनकी रचनाओं ने अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच संवाद को बढ़ावा दिया। यही वजह है कि उनकी कला आज भी व्यापक स्तर पर लोगों को प्रभावित करती है।

कार्यक्रम में ये प्रमुख लोग रहे मौजूद

कार्यक्रम में प्रथम महिला रानी डेका काकोटी, विधायक पुरंदर मिश्रा और अनुज शर्मा उपस्थित रहे। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना और संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारती दासन सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी सांस्कृतिक संध्या में सहभागिता की।

एक नजर में

  • कार्यक्रम: सांस्कृतिक संध्या
  • अवसर: डॉ. भूपेन हजारिका की जन्मशताब्दी
  • स्थान: छत्तीसगढ़ मंडपम, लोक भवन, रायपुर
  • प्रमुख प्रस्तुतियां: नृत्य-नाटिका और गीत
  • विशेष अतिथि: राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

कुल मिलाकर, भूपेन हजारिका स्मृति समारोह ने महान कलाकार की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिया। संगीत और नृत्य के जरिए उनके जीवन तथा विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

मुख्य बातें

Share This Article
Leave a comment