ISI की रणनीति: मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान के दावे पर सवाल

CG DARSHAN
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मसूद अजहर को लेकर पाकिस्तान और भारतीय एजेंसियों के दावे अलग हैं। पाकिस्तान का कहना है कि जैश प्रमुख अफगानिस्तान में छिपा है। इसके लिए फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने इनाम भी बढ़ाया है।

पाकिस्तान ने इनाम की राशि 70 लाख पाकिस्तानी रुपये कर दी है। वहीं, भारतीय खुफिया एजेंसियां उसे पाकिस्तान में मौजूद बता रही हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, उसके ठिकाने लगातार बदले जा रहे हैं। इसके पीछे सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय दबाव दोनों को वजह बताया गया है।

पाकिस्तान के दावे में क्या कहा गया है?

पाकिस्तान की FIA ने अजहर के खिलाफ नई इनामी राशि घोषित की है। एजेंसी का दावा है कि वह अफगानिस्तान में मौजूद है।

हालांकि, अफगान तालिबान ऐसे दावों को पहले खारिज कर चुका है। इसलिए पाकिस्तान के दावे पर सवाल भी उठ रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय दबाव से जुड़ा हो सकता है। पाकिस्तान आतंकवाद की फंडिंग को लेकर लंबे समय से निगरानी में रहा है।

भारतीय एजेंसियों का दावा कितना अलग है?

भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, मसूद अजहर पाकिस्तान में ही मौजूद है। एजेंसियों को उसकी गतिविधियों से जुड़े संकेत मिलने का दावा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह बहावलपुर में था। हालांकि, वह जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय में मौजूद नहीं था।

इसके बाद उसे रावलपिंडी स्थित सैन्य अस्पताल ले जाने की बात सामने आई। बाद में उसके कई ठिकाने बदलने का दावा किया गया।

ISI की रणनीति में ठिकाने बदलना क्यों अहम?

ISI की रणनीति के तहत अजहर को लंबे समय तक एक जगह नहीं रखने का दावा है। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, उसे लगातार स्थानांतरित किया जाता है।

बहावलपुर, रावलपिंडी और नवाबशाह का नाम सामने आया है। PoK के स्कार्दू में भी सुरक्षित ठिकाने का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, मौजूदा स्थिति में उसे PoK से दूर रखने की बात कही गई है। रिपोर्ट में नवाबशाह और रावलपिंडी के बीच आवाजाही का दावा है।

ISI अजहर को क्यों सुरक्षित रखना चाहती है?

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, अजहर जैश-ए-मोहम्मद का प्रभावशाली चेहरा है। इसलिए उसकी सुरक्षा को संगठन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

रिपोर्ट में उसके ऑडियो संदेशों का भी उल्लेख है। इन संदेशों के जरिए वह अपने समर्थकों और कैडर से संपर्क करता रहा है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय निगरानी बढ़ने के कारण उसकी गतिविधियां सीमित रखने की बात कही गई है।

अफगानिस्तान भेजना क्यों मुश्किल माना जा रहा है?

पाकिस्तान और अफगान तालिबान के रिश्तों में तनाव की बात सामने आई है। ऐसे हालात में अजहर को अफगानिस्तान भेजना जोखिम भरा हो सकता है।

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यही वजह पाकिस्तान में उसके होने की संभावना बढ़ाती है। हालांकि, उसके वास्तविक ठिकाने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

PoK में विरोध के बाद क्या बदला?

रिपोर्ट के मुताबिक, PoK में विरोध प्रदर्शनों का असर आतंकी भर्ती रणनीति पर पड़ा है। अधिकारियों ने वहां भर्ती गतिविधियां प्रभावित होने का दावा किया है।

इसके बाद पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों पर ध्यान देने की बात कही गई है। जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का भी उल्लेख किया गया है।

इसी बदलाव के बीच अजहर को PoK से दूर रखने का दावा सामने आया है।

जैश की रणनीति में भी बदलाव का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी गतिविधियों में बदलाव किया है। संगठन पर प्रॉक्सी समूहों के इस्तेमाल का आरोप है।

PAFF का भी इस संदर्भ में उल्लेख किया गया है। इस समूह ने जम्मू-कश्मीर में कुछ हमलों की जिम्मेदारी ली है।

ऐसी रणनीति से आतंकी नेटवर्क की पहचान कठिन हो सकती है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया है।

FATF बैठक से पहले क्या है बड़ा मुद्दा?

पाकिस्तान की कार्रवाई को FATF की निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अजहर को लो-प्रोफाइल रखने की कोशिश हो सकती है।

अधिकारियों ने उसके ऑडियो संदेश बंद होने की भी बात कही है। इसका उद्देश्य उसकी गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान कम करना बताया गया है।

26 से 30 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित FATF बैठक भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पाकिस्तान पर कार्रवाई दिखाने का दबाव होने की बात कही गई है।

किन बिंदुओं पर रहेगी नजर?

  • पाकिस्तान के आधिकारिक दावों और आगे की कार्रवाई पर।
  • भारतीय एजेंसियों की नई जानकारी पर।
  • पाकिस्तान-अफगानिस्तान संबंधों में बदलाव पर।
  • FATF की आगामी बैठक से जुड़े घटनाक्रम पर।

मामले से जुड़े प्रमुख तथ्य

  • पाकिस्तान ने अजहर पर 70 लाख रुपये का इनाम घोषित किया।
  • FIA उसे अफगानिस्तान में छिपा हुआ बता रही है।
  • भारतीय एजेंसियां उसके पाकिस्तान में होने का दावा करती हैं।
  • उसके कई संभावित ठिकानों का उल्लेख रिपोर्ट में किया गया है।

कुल मिलाकर, ISI की रणनीति को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। पाकिस्तान का दावा और भारतीय एजेंसियों की जानकारी एक-दूसरे से अलग है।

इस मामले में स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी दावे को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। आने वाली खुफिया जानकारी से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

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