Lust Stories 3 Review: चार कहानियों का असर

CG DARSHAN
CG DARSHAN 7 Min Read
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एंथोलॉजी फिल्म में चार अलग कहानियां एक ही विषय को अलग नजरिए से दिखाती हैं। Lust Stories 3 Review में रिश्तों, आकर्षण और निजी इच्छाओं के कई रंग दिखाई देते हैं। इस बार निर्देशन की जिम्मेदारी किरण राव, शकुन बत्रा, विक्रमादित्य मोटवानी और विशाल भारद्वाज ने संभाली है। चारों कहानियों की अपनी अलग दुनिया है। हालांकि, सभी कहानियां समान भावनात्मक असर नहीं छोड़ पातीं।

फिल्म की सबसे खास बात इसका विषय है। कहानी सिर्फ आकर्षण या शारीरिक रिश्तों तक सीमित नहीं रहती। इसमें शादी, अकेलापन, आजादी और खुद को समझने की कोशिश भी शामिल है। यही वजह है कि हर कहानी रिश्तों को अलग तरीके से देखती है।

Lust Stories 3 Review में चार कहानियों की अलग दुनिया

किरण राव ने मुंबई की कहानी को दिया हल्का अंदाज

किरण राव की कहानी करण और लिसा के इर्द-गिर्द घूमती है। करण मुंबई में पिज्जा डिलीवरी का काम करता है। इसके साथ ही वह गलत कामों से भी जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर लिसा बेहतर जिंदगी की तलाश में मुंबई आई है।

दोनों की मुलाकात धीरे-धीरे रिश्ते में बदलती है। कहानी में मुंबई की भागदौड़ और संघर्ष को अच्छी तरह दिखाया गया है। शहर की लोकेशन और माहौल कहानी को खास बनाते हैं।

हालांकि, कहानी आगे बढ़ने के साथ इसके कई मोड़ आसानी से समझ आने लगते हैं। इससे रोमांच थोड़ा कम हो जाता है। गुरफतेह पीरजादा ने अपने किरदार को सहज रखने की कोशिश की है। वहीं, सना थंपी भी अपनी भूमिका में ठीक नजर आती हैं।

शकुन बत्रा ने शादी की घुटन को दिखाया

दूसरी कहानी वरुण और सयाली की शादीशुदा जिंदगी पर केंद्रित है। दोनों के बीच बातचीत अक्सर बहस में बदल जाती है। इसके बावजूद उनके बीच नजदीकी के कुछ पल अलग तस्वीर पेश करते हैं।

धीरे-धीरे दोनों इस रिश्ते से बाहर निकलने के रास्ते खोजते हैं। कहानी शादी को लेकर समाज की पुरानी सोच पर भी सवाल उठाती है। खासकर माता-पिता की उस सोच को दिखाया गया है, जहां शादी को जिम्मेदारी मान लिया जाता है।

अली फजल ने वरुण के किरदार की अलग-अलग परतों को अच्छी तरह पकड़ा है। राधिका मदान भी कई दृश्यों में प्रभावी नजर आती हैं। हालांकि, कुछ हिस्सों में कहानी वास्तविकता से थोड़ी दूर लगती है।

मोटवानी की कहानी में दोस्ती और आत्मखोज

विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी दो शादीशुदा महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे इन भूमिकाओं में दिखाई देती हैं। दोनों की जिंदगी में समय के साथ रोमांच और आकर्षण कम हो चुका है।

दोनों इस एकरसता से निकलने का असामान्य फैसला करती हैं। कहानी महिलाओं की इच्छाओं को सीधे तौर पर गलत नहीं ठहराती। इसके बजाय वह उनकी व्यक्तिगत पहचान और जरूरतों पर ध्यान देती है।

कोंकणा और राधिका का अभिनय इस हिस्से को मजबूती देता है। विजय वर्मा भी कम संवादों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। कहानी में दोनों महिलाओं की दोस्ती भी अहम भूमिका निभाती है। हालांकि, इसका अंतिम हिस्सा उतना प्रभावशाली नहीं बन पाता।

विशाल भारद्वाज की कहानी में दिखी ज्यादा गहराई

Lust Stories 3 Review में विशाल भारद्वाज की कहानी सबसे अलग माहौल तैयार करती है। इसकी पृष्ठभूमि पुराने दौर के हैदराबाद से जुड़ी है। कहानी साइरा और बदरू के वैवाहिक जीवन पर आधारित है।

साइरा अपनी तय दिनचर्या से आगे बढ़ना चाहती है। उसकी इच्छा केवल शारीरिक नजदीकी तक सीमित नहीं है। वह नए अनुभव और खुद को समझने की आजादी चाहती है।

अदिति राव हैदरी ने साइरा के किरदार को संवेदनशीलता के साथ निभाया है। सिद्धार्थ भी उनके साथ सहज नजर आते हैं। दोनों की स्क्रीन केमिस्ट्री कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करती है।

विशाल भारद्वाज ने इच्छा को केवल आकर्षण के रूप में पेश नहीं किया। उन्होंने इसे व्यक्ति की आत्मस्वीकृति से जोड़ने की कोशिश की है। इसी वजह से यह कहानी बाकी हिस्सों से ज्यादा भावनात्मक गहराई रखती है।

अभिनय और निर्देशन में क्या रहा खास

Lust Stories 3 Review से साफ होता है कि चारों निर्देशकों की शैली काफी अलग है। कहीं कहानी हल्के अंदाज में आगे बढ़ती है। कहीं रिश्तों की जटिलता ज्यादा प्रमुख हो जाती है।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका कलाकारों वाला पक्ष है। कोंकणा सेन शर्मा, राधिका आप्टे, अली फजल और अदिति राव हैदरी अपने किरदारों में असर छोड़ते हैं। वहीं, कुछ नए कलाकारों के हिस्से में सीमित भावनात्मक गुंजाइश दिखाई देती है।

कहानियों की गति भी एक जैसी नहीं है। कुछ हिस्से जल्दी आगे बढ़ते हैं। वहीं, कुछ जगह संवाद और परिस्थितियां ज्यादा समय लेती हैं। इसलिए एंथोलॉजी का अनुभव हर कहानी में अलग महसूस होता है।

चारों कहानियों की खासियत

  • किरण राव की कहानी मुंबई और दो युवाओं के संघर्ष पर केंद्रित है।
  • शकुन बत्रा ने शादी और रिश्ते की घुटन को विषय बनाया है।
  • विक्रमादित्य मोटवानी ने महिलाओं की इच्छाओं और आत्मखोज को दिखाया है।
  • विशाल भारद्वाज ने इच्छा और आत्मस्वीकृति को भावनात्मक अंदाज दिया है।

फिल्म में क्या काम करता है

  • चार निर्देशकों की अलग-अलग कहानी कहने की शैली।
  • रिश्तों और इच्छाओं को अलग नजरिए से देखने की कोशिश।
  • कई कलाकारों का प्रभावी और सहज अभिनय।
  • अलग-अलग सामाजिक और भावनात्मक परिस्थितियों की प्रस्तुति।
  • कुछ हिस्सों में मजबूत निर्देशन और याद रहने वाले दृश्य।

कुल मिलाकर, फिल्म का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है। चारों कहानियां एक ही विषय को अलग तरीके से समझने की कोशिश करती हैं। हालांकि, कहानी की गहराई और प्रभाव हर हिस्से में समान नहीं है।

कुछ ट्विस्ट पहले ही समझ में आ जाते हैं। वहीं, कुछ किरदारों को और विस्तार मिल सकता था। इसके बावजूद फिल्म रिश्तों को लेकर कई सवाल छोड़ती है। खासकर महिलाओं की इच्छाओं और उनकी निजी पहचान को लेकर।

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