बालाघाट में बालाघाट बैगा बच्चे कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित मिले हैं। राष्ट्रीय संयुक्त आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम ने मामलों की जांच की। रिपोर्ट में खसरा और मलेरिया के संक्रमण सामने आए। कुछ मरीजों में दोनों बीमारियां एक साथ मिलीं।
जांच में गंभीर कुपोषण के मामले भी दर्ज किए गए। साथ ही, स्वास्थ्य निगरानी और टीकाकरण व्यवस्था से जुड़े कई अंतर सामने आए। एनजेओआरटी ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की है।
196 मामलों में 156 बच्चे दस साल से कम
एनजेओआरटी की जांच में कुल 196 मामले सामने आए। इनमें 156 मरीज दस साल से कम उम्र के बच्चे थे। यानी कुल मामलों में करीब 80 प्रतिशत बच्चे इसी आयु वर्ग के रहे।
इनमें 108 बच्चे शून्य से पांच साल के थे। वहीं, 48 बच्चे छह से दस साल की उम्र के थे। एक साल से कम उम्र के 12 बच्चे भी जांच में शामिल थे।
मरीजों में 101 लड़कियां और 95 लड़के थे। 173 मरीजों में सर्दी और बुखार के लक्षण मिले। 51 मरीजों के शरीर पर दाने दर्ज किए गए।
मलेरिया की पुष्टि भी कई मरीजों में हुई। कुल 52 मरीजों में मलेरिया दर्ज किया गया। ये मामले बालाघाट के 31 गांवों से सामने आए।
कुंडेकासा में 32 मामले मिले। बोंदारी में 27 और कोरका में 22 मामले दर्ज किए गए। गथिया और घुम्मर में भी कई मरीज सामने आए।
बालाघाट बैगा बच्चों में मिले दो संक्रमण
बालाघाट बैगा बच्चे जिन स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित मिले, उनमें खसरा और मलेरिया प्रमुख रहे। 64 नमूनों की जांच की गई। इनमें 25 नमूने खसरा पॉजिटिव मिले।
एनसीडीसी ने दस गले के नमूनों की जांच की। इनमें सात नमूनों में खसरे की पुष्टि हुई। सभी सात नमूनों में डी-8 जीनोटाइप मिला।
मलेरिया की जांच में भी बड़ी संख्या में पॉजिटिव मामले मिले। 32 मरीजों की जांच में 27 पॉजिटिव पाए गए। वहीं, 12 मरीजों में खसरा और मलेरिया दोनों संक्रमण मिले।
इसके अलावा, दो डेंगू मामले भी सामने आए। एक नमूना चिकनगुनिया पॉजिटिव मिला। दो नमूनों में एंटरोवायरस की पुष्टि हुई।
दूसरी ओर, इन्फ्लुएंजा और कोविड-19 की जांच निगेटिव रही। जापानी इंसेफेलाइटिस और अन्य कुछ वायरस की जांच भी निगेटिव दर्ज हुई।
तीन बच्चों की मौत की समीक्षा में कुपोषण
एनजेओआरटी ने तीन बच्चों की मौत की भी समीक्षा की। तीनों बच्चे पांच साल से कम उम्र के थे। इनमें एक बच्चे की मलेरिया जांच पॉजिटिव मिली थी।
एक बच्चे की मौत घर पर हुई। दूसरे की अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। तीसरे बच्चे की मौत अस्पताल में हुई।
मृत बच्चों में एक की पोषण स्थिति बेहद कमजोर मिली। उसकी बांह की ऊपरी परिधि यानी एमयूएसी 9.3 सेंटीमीटर थी।
उसका वजन और लंबाई का अनुपात -3 एसडी से कम था। रिपोर्ट में इसे गंभीर कुपोषण का संकेत माना गया। इससे संक्रमण के साथ पोषण की स्थिति भी महत्वपूर्ण सामने आई।
बिरसा में 604 बच्चे एसएएम श्रेणी में
रिपोर्ट में बिरसा क्षेत्र की पोषण स्थिति का भी उल्लेख है। 357 आंगनवाड़ी केंद्रों के आंकड़ों की समीक्षा की गई।
इन केंद्रों में 2,589 बच्चे एसएएम और एमएएम श्रेणी में दर्ज थे। इनमें 604 बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण यानी एसएएम श्रेणी में मिले।
सोंगुड्डा सेक्टर में एसएएम का स्तर 34.9 प्रतिशत दर्ज हुआ। डाबरी में यह 30.5 प्रतिशत रहा। कचनारी-02 में एसएएम का स्तर 26.2 प्रतिशत दर्ज किया गया।
मैदानी आकलन में भी कई घरों में बच्चों का अत्यधिक दुबलापन देखा गया। रिपोर्ट में ऐसे बच्चों की लगातार निगरानी की जरूरत बताई गई है।
2,882 लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच
प्रभावित इलाकों में 2,882 लोगों की सामुदायिक स्क्रीनिंग की गई। इनमें 102 लोगों को बुखार के साथ दाने थे।
769 लोगों में बुखार या सर्दी-खांसी के लक्षण मिले। वहीं, 241 लोगों में मलेरिया दर्ज किया गया। 120 लोगों में दस्त की समस्या सामने आई।
इसके अलावा, 160 लोगों में त्वचा संबंधी समस्या दर्ज हुई। कुंडेकासा के अस्थायी उपचार केंद्र में रोज करीब 70 मरीज पहुंचे।
एनजेओआरटी ने प्रभावित क्षेत्रों में दैनिक निगरानी की सिफारिश की। टीम ने घर-घर सक्रिय केस खोजने पर भी जोर दिया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था और टीकाकरण में अंतर
बालाघाट बैगा बच्चे प्रभावित होने की जांच के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्था की कई कमियां भी सामने आईं। जिला सर्विलांस यूनिट में कर्मचारियों की कमी बताई गई।
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट का पद खाली है। जिले में जिला पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी नहीं है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट का पद भी रिक्त बताया गया है।
सबसे प्रभावित गांव में एक साल से ज्यादा समय से आशा कार्यकर्ता नहीं होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई। इससे मरीजों की पहचान और फॉलोअप प्रभावित होने की बात कही गई है।
टीकाकरण के आंकड़ों में भी अंतर दर्ज हुआ। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच बैहर में एमआर-1 कवरेज 51 प्रतिशत रहा। एमआर-2 कवरेज 49 प्रतिशत दर्ज हुआ।
बिरसा में एमआर-1 कवरेज 64.8 प्रतिशत और एमआर-2 कवरेज 65 प्रतिशत रहा। अप्रैल से जुलाई 2026 के दौरान आंकड़ों में सुधार दर्ज किया गया।
बिरसा में एमआर-1 कवरेज 70.4 प्रतिशत और पूर्ण टीकाकरण 70.2 प्रतिशत रहा। बैहर में एमआर-1 कवरेज 87.1 प्रतिशत दर्ज हुआ।
बालाघाट बैगा बच्चे से जुड़े मामलों को देखते हुए एनजेओआरटी ने छूटे बच्चों की पहचान की सिफारिश की है। साथ ही, एमआर टीकाकरण और विटामिन-ए की खुराक पूरी कराने पर जोर दिया गया है।
जांच में संक्रमण और कुपोषण दोनों से जुड़े मामले सामने आए। रिपोर्ट ने स्वास्थ्य निगरानी और टीकाकरण व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत बताई है।

