भियानबस्तर में कृत्रिम अंग वितरण के लिए बड़ा सहायता शिविर लगाया गया है। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में तीन दिवसीय शिविर आयोजित हुआ। इसमें 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन हुआ है।
शिविर में नक्सली विस्फोट और सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित लोगों को सहायता मिल रही है। अन्य कारणों से दिव्यांग हुए लोगों को भी उपकरण दिए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।
चार जिलों के लोगों को मिल रही सहायता
शिविर में बस्तर संभाग के चार जिलों के लोग शामिल हुए हैं। इनमें बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिले शामिल हैं। जरूरत के अनुसार हितग्राहियों को अलग-अलग उपकरण दिए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ मौके पर हितग्राहियों का नाप ले रहे हैं। इसके बाद उनकी जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग तैयार किए जा रहे हैं। शिविर में आधुनिक ऑन-साइट कार्यशाला भी बनाई गई है।
पहले दिन 70 से अधिक लोगों को कृत्रिम अंग दिए गए। इसके अलावा व्हीलचेयर और ट्राइसाइकिल भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। जरूरतमंदों को बैसाखी, कैलिपर्स और श्रवण यंत्र भी दिए जा रहे हैं।
मौके पर हो रहा कृत्रिम अंग वितरण
कृत्रिम अंग वितरण के साथ मौके पर ही अंग तैयार करने की सुविधा दी गई है। विशेषज्ञ पहले हितग्राही की जरूरत समझते हैं। इसके बाद व्यक्तिगत नाप लेकर कृत्रिम हाथ या पैर तैयार किया जाता है।
इस व्यवस्था से लोगों को दूसरे शहरों में जाने की जरूरत कम हुई है। उन्हें एक ही स्थान पर कई सुविधाएं मिल रही हैं। इससे पुनर्वास की प्रक्रिया भी आसान हो रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया शुभारंभ
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिविर का वर्चुअल शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि बस्तर अब हिंसा के दौर से बाहर निकल रहा है। क्षेत्र विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिविर केवल उपकरण बांटने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मान और आत्मनिर्भरता देना है। उन्होंने प्रभावित लोगों को सरकार के सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
उन्होंने शांत और विकसित बस्तर के निर्माण पर जोर दिया। साथ ही, दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण को महत्वपूर्ण बताया।
विजय शर्मा ने पुनर्वास पर दिया जोर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने हिंसा से प्रभावित लोगों को दोबारा संबल देने की बात कही। उन्होंने आईईडी विस्फोटों में घायल लोगों का उल्लेख भी किया।
उन्होंने ग्रामीण संतोष पोयाम का उदाहरण दिया। इसके अलावा पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी का उल्लेख किया। ये लोग कृत्रिम अंगों की मदद से आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित लोगों का पुनर्वास जरूरी है। इससे उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजन
यह कृत्रिम अंग वितरण अ सेवा संकल्प अभियान का हिस्सा है। सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहा है। जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग इसके संचालन में सहयोग कर रहे हैं।
भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, एनएसई फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना भी अभियान से जुड़े हैं। इनके सहयोग से विशेषज्ञ सेवाएं शिविर में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मेडिकल जांच और पेंशन की भी सुविधा
शिविर में स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम मौजूद है। टीम हितग्राहियों की जांच कर रही है। पात्र लोगों को मौके पर मेडिकल सर्टिफिकेट भी दिया जा रहा है।
इसके अलावा पात्र हितग्राहियों को दिव्यांग पेंशन से जोड़ा जा रहा है। उन्हें अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी दिलाया जा रहा है। इससे उन्हें सरकारी कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे।
कृत्रिम अंग वितरण के साथ कई सरकारी सुविधाएं एक जगह उपलब्ध कराई जा रही हैं। इससे हितग्राहियों का समय और मेहनत बच रही है। साथ ही, उन्हें आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिल रही है।

