कैबिनेट का बड़ा फैसला, लॉजिस्टिक्स और MSME सेक्टर को मिलेगी नई ताकत

CG DARSHAN
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केंद्र सरकार ने परिवहन और MSME क्षेत्र से जुड़े दो बड़े फैसले लिए हैं। कैबिनेट ने लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये के वृद्धि कोष को भी मंजूरी मिली है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की जानकारी दी।

इन दोनों पहलों का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। सरकार का लक्ष्य परिवहन व्यवस्था में बेहतर तालमेल बनाना है। वहीं, MSME को विस्तार के लिए जरूरी पूंजी उपलब्ध कराना भी उद्देश्य है।

लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण से परिवहन योजना होगी मजबूत

नया लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण देश में एकीकृत परिवहन योजना को बढ़ावा देगा। यह परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी योजनाओं में तालमेल बनाएगा। इसके अलावा, यह परियोजनाओं के मूल्यांकन और निगरानी को मजबूत करेगा।

प्राधिकरण अनुसंधान और डेटा विश्लेषण पर भी ध्यान देगा। इससे अलग-अलग परिवहन परियोजनाओं की बेहतर योजना बन सकेगी। सरकार इसे एक राष्ट्रीय शीर्ष संस्था के रूप में विकसित करेगी।

लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण करेगा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन

लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक की केंद्रीय परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा। इसका उद्देश्य परियोजनाओं में बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है। साथ ही, यह बहु-मॉडल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देगा।

यह संस्था राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 की समीक्षा में भी मदद करेगी। जरूरत के अनुसार नीति में बदलाव के लिए सुझाव दिए जाएंगे। इससे देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

10 हजार करोड़ रुपये के फंड से MSME को मिलेगा सहारा

सरकार ने MSME के लिए 10,000 करोड़ रुपये के वृद्धि कोष को भी मंजूरी दी है। यह फंड उच्च क्षमता वाले उद्यमों को दीर्घकालिक इक्विटी पूंजी देगा। इससे कारोबार बढ़ाने की योजना बना रहे उद्यमों को मदद मिलेगी।

केंद्रीय बजट 2026-27 में इस फंड की घोषणा की गई थी। इसका उद्देश्य MSME क्षेत्र में वृद्धि पूंजी की कमी दूर करना है। इससे सक्षम उद्यमों को अपने कारोबार का विस्तार करने में मदद मिलेगी।

इन क्षेत्रों को मिल सकता है फंड का लाभ

फंड का बड़ा हिस्सा विनिर्माण क्षेत्र के MSME को मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, सेवा और तकनीकी क्षेत्र भी इसके दायरे में होंगे। नवाचार आधारित कंपनियों को भी इससे समर्थन मिल सकता है।

रणनीतिक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़े उद्यमों को भी प्राथमिकता मिलेगी। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

फैसलों से कारोबार और रोजगार को मिल सकता है बढ़ावा

लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण से परिवहन परियोजनाओं में बेहतर तालमेल की उम्मीद है। वहीं, वृद्धि कोष से MSME को विस्तार के लिए पूंजी मिलेगी। दोनों फैसले अलग-अलग क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ा सकते हैं।

सरकार इन पहलों को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ रही है। हालांकि, इनके प्रभाव की वास्तविक तस्वीर क्रियान्वयन के बाद सामने आएगी।

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