बस्तर दशहरा के प्रमुख आयोजनों में शामिल होंगे राज्यपाल, मिला निमंत्रण

CG DARSHAN
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रायपुर में राज्यपाल श्री रमेन डेका से महाराजा श्री कमल चंद्र भंज देव ने भेंट की। यह मुलाकात लोक भवन में हुई। इस दौरान महाराजा ने राज्यपाल को ऐतिहासिक दशहरा उत्सव में शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने उत्सव की धार्मिक और सांस्कृतिक विशेषताओं की जानकारी भी साझा की।

महाराजा कमल चंद्र भंज देव बस्तर राज परिवार से जुड़े हैं। वे माटी पुजारी और रथपति की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने राज्यपाल को आगामी प्रमुख आयोजनों के बारे में बताया। साथ ही, उत्सव से जुड़ी परंपराओं और कार्यक्रमों की जानकारी दी।

बस्तर दशहरा के खास कार्यक्रमों में आने का आग्रह

महाराजा ने राज्यपाल को दशहरा उत्सव के प्रमुख आयोजनों में शामिल होने का न्योता दिया। इनमें महाराजा नवाखाई और महाराजा बाहर रहनी कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों का बस्तर की धार्मिक परंपराओं में खास स्थान है।

भेंट के दौरान उत्सव की विभिन्न रस्मों पर भी चर्चा हुई। महाराजा ने आयोजन से जुड़ी स्थानीय परंपराओं को विस्तार से बताया। उन्होंने बस्तर की लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की विशेषताओं को सामने रखा।

बस्तर दशहरा की परंपराओं को बताया खास

बस्तर का दशहरा अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। इसकी कई रस्में स्थानीय धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी हैं। वहीं, उत्सव में बस्तर की लोक संस्कृति की झलक भी मिलती है। इसलिए इसका महत्व धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर सांस्कृतिक रूप में भी है।

राज्यपाल रमेन डेका ने भी उत्सव के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इसकी विशिष्ट परंपराएं प्रदेश को अलग सांस्कृतिक पहचान देती हैं।

लोक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संगम

राज्यपाल ने कहा कि बस्तर की पारंपरिक परंपराएं प्रदेश की विरासत को मजबूत करती हैं। ऐसे आयोजन स्थानीय लोक आस्था को नई पीढ़ी से जोड़ते हैं। साथ ही, इनसे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता सामने आती है।

इसके अलावा, उत्सव में कई पारंपरिक धार्मिक आयोजन होते हैं। इनमें स्थानीय रीति-रिवाजों और मान्यताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इससे बस्तर की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होती है।

राज्यपाल रमेन डेका ने जताया आभार

महाराजा कमल चंद्र भंज देव ने राज्यपाल को प्रमुख कार्यक्रमों में आने का निमंत्रण दिया। राज्यपाल ने इस आमंत्रण के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने बस्तर की सांस्कृतिक परंपराओं के महत्व को भी रेखांकित किया।

कुल मिलाकर, राज्यपाल और महाराजा की यह भेंट संस्कृति से जुड़ी रही। इस दौरान दशहरा उत्सव के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। साथ ही, राज्यपाल को प्रमुख आयोजनों में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण मिला।

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