भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर आम जनता को राहत दे सकता है।
अगस्त में संभावित मौद्रिक नीति बैठक में RBI रेपो रेट कटौती की संभावना जताई जा रही है।
RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बयान दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो नीतिगत दरों में कमी की जा सकती है।
उनके अनुसार, न्यूट्रल रुख का यह अर्थ नहीं कि दरों में बदलाव नहीं होगा।
वर्तमान आर्थिक संकेतकों की बात करें तो जून महीने में खुदरा महंगाई (CPI) गिरकर 2.1% पर पहुंच गई है।
यह दर पिछले 77 महीनों में सबसे निचले स्तर पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि FY26 में महंगाई दर 3.5% से भी नीचे जा सकती है।
ऐसे में RBI रेपो रेट कटौती का रास्ता साफ होता जा रहा है।
अगर RBI इस पर फैसला करता है, तो इसका सीधा असर आपकी EMI पर पड़ेगा।
लोन सस्ते होंगे और नए ऋण की सुविधा पहले से अधिक किफायती बन जाएगी।
महंगाई की यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है।
वास्तव में जून में कार बिक्री 18 महीनों में सबसे कम रही।
रियल एस्टेट और ज्वेलरी जैसे सेक्टरों में भी मांग घटती नजर आई है।
इन संकेतों को देखते हुए विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि अगस्त, अक्टूबर या दिसंबर में दरों में कटौती की पूरी संभावना है।
CITY ब्रोकरेज का यह भी मानना है कि जुलाई में खुदरा महंगाई रिकॉर्ड 1.1% के आसपास हो सकती है।
यदि यह अनुमान सही बैठते हैं, तो यह 1990 के बाद भारत की सबसे कम महंगाई दर होगी।
ऐसे में नीतिगत दरों में कटौती का निर्णय भारत की आर्थिक गति को और बल देगा।
इसका सबसे सीधा फायदा उन लोगों को होगा जिनके ऊपर लोन का बोझ है।
उनकी मासिक किस्तें कम होंगी और कर्ज लेना पहले से ज्यादा सरल व सस्ता हो जाएगा।

