दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावकों में गिने जाने वाले फौजा सिंह नहीं रहे।
पंजाब में एक वाहन की टक्कर से उनकी जान चली गई। वे 114 वर्ष के थे और अपनी सक्रिय जीवनशैली के लिए विश्वभर में पहचाने जाते थे।
घटना के वक्त वे राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर रहे थे, तभी एक कार ने उन्हें टक्कर मार दी।
परिवार ने बताया कि उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन कुछ ही देर में उनका निधन हो गया।
पंजाब पुलिस ने इस मामले में 26 वर्षीय आरोपी अमृतपाल सिंह ढिल्लों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, वह घटना के समय अकेले सफर कर रहे थे और उन्होंने अपराध स्वीकार कर लिया है।
फौजा सिंह का जीवन असाधारण था। 100 साल की उम्र में मैराथन पूरी करने वाले वे पहले व्यक्ति माने जाते हैं।
हालांकि जन्म प्रमाणपत्र न होने के कारण गिनीज़ रिकॉर्ड में उनका नाम नहीं जुड़ सका।
उनका जन्म ब्रिटिश राज के दौर में हुआ था, जब ग्रामीण भारत में जन्म प्रमाणपत्र जारी नहीं होते थे।
ब्रिटिश पासपोर्ट में उनकी जन्मतिथि 1 अप्रैल 1911 दर्ज है और उन्हें 100वें जन्मदिन पर रानी एलिज़ाबेथ की ओर से बधाई पत्र भी मिला था।
फौजा सिंह 1992 से लंदन में रह रहे थे और कई अंतरराष्ट्रीय मैराथनों में हिस्सा ले चुके थे।
उनका रनिंग क्लब ‘Sikhs in the City’ अब उनकी स्मृति में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भगवंत मान और अन्य प्रमुख नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया।
पीएम मोदी ने कहा, “फौजा सिंह जी ने न केवल फिटनेस का संदेश दिया, बल्कि युवाओं को प्रेरित भी किया।”
फौजा सिंह की फिटनेस का रहस्य था—नियमित चलना, संयमित जीवन और मानसिक शांति।
वे हर दिन गांव का चक्कर लगाते थे और कहते थे, “पैरों को चलता रखना ही उम्र की असली दवा है।”
उनकी प्रेरणा आज भी लाखों लोगों को जीवन में आगे बढ़ने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित करती है।
उनका जीवन बताता है कि उम्र सिर्फ एक संख्या है, जुनून हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है।
