भारत और कनाडा अपने आर्थिक रिश्तों को मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी CEPA पर बातचीत जारी है। इसका उद्देश्य व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खोलना है।
अमेरिका के साथ व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच कनाडा नए बाजारों पर ध्यान दे रहा है। भारत भी अपने निर्यातकों और कारोबारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय अवसर बढ़ाना चाहता है। ऐसे में प्रस्तावित समझौता दोनों देशों के लिए अहम हो सकता है।
भारत-कनाडा व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं?
कनाडा सरकार के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा। इसमें केवल वस्तुओं का व्यापार 13.6 अरब डॉलर था। दोनों आंकड़ों में अंतर सेवाओं के कारोबार की वजह से है।
दोनों देश 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए बाजार तक पहुंच, निवेश और कारोबारी साझेदारी बढ़ाना जरूरी होगा।
बातचीत में तेजी क्यों आई?
अक्टूबर 2026 में कनाडा ने लगभग 300 प्रतिनिधियों वाला व्यापार मिशन भारत भेजा। यह तीन दशक से अधिक समय में भारत आया कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल बताया गया है। प्रतिनिधियों ने मुंबई और बेंगलुरु में कारोबारी अवसरों पर ध्यान दिया।
13 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी बातचीत की। दोनों नेताओं ने आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने और समझौते की वार्ता जल्द पूरी करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कनाडा के प्रधानमंत्री की दिसंबर में भारत यात्रा की भी योजना है।
भारत को किन क्षेत्रों में मिल सकता है फायदा?
प्रस्तावित समझौते से भारतीय निर्यातकों को कनाडा के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है। दवा, कपड़ा, इंजीनियरिंग उत्पाद और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को लाभ मिल सकता है। हालांकि, वास्तविक लाभ अंतिम शर्तों पर निर्भर करेगा।
भारत को ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति में भी सहयोग मिल सकता है। इसके अलावा आईटी, डिजिटल सेवाओं और अनुसंधान के क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएं हैं।
कनाडा को क्या हासिल हो सकता है?
कनाडा भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार में अपनी कंपनियों की पहुंच बढ़ाना चाहता है। कृषि-खाद्य उत्पाद, ऊर्जा, स्वच्छ तकनीक और एयरोस्पेस इसके संभावित सहयोग क्षेत्र हैं।
भारत में निवेश बढ़ने से कनाडाई कंपनियों को नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं। साथ ही, अमेरिका से बाहर निर्यात बाजारों का विस्तार करने की कनाडा की रणनीति को भी समर्थन मिल सकता है।
दोनों देशों के लिए संभावित फायदे
- भारत: निर्यात, आईटी सेवाओं, निवेश और ऊर्जा सुरक्षा में नए अवसर मिल सकते हैं।
- कनाडा: भारतीय बाजार में पहुंच, निवेश और व्यापारिक साझेदारी का विस्तार हो सकता है।
ये संभावित लाभ हैं। इनकी वास्तविक सीमा समझौते की शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
क्या 2026 में समझौता पूरा हो पाएगा?
दोनों देशों ने 2026 के अंत तक बातचीत पूरी करने का लक्ष्य रखा है। अक्टूबर में वार्ता के पांचवें दौर के बाद भी कई मुद्दों पर सहमति बनाना जरूरी है। इसलिए तय समयसीमा लक्ष्य है, इसकी गारंटी नहीं।
समझौते के रास्ते में क्या चुनौतियां हैं?
कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बाजार खोलने पर सहमति बनाना कठिन हो सकता है। आयात शुल्क, उत्पादों के मूल स्थान से जुड़े नियम और गैर-टैरिफ बाधाओं पर भी चर्चा जरूरी होगी।
दोनों पक्षों को घरेलू उद्योगों के हितों और व्यापार बढ़ाने के लक्ष्य में संतुलन बनाना होगा। इन मुद्दों पर सहमति समझौते की गति और शर्तों को प्रभावित कर सकती है।
आगे की दिशा पर नजर
भारत और कनाडा के बीच जारी वार्ता आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकती है। कारोबार, ऊर्जा, निवेश और सेवाओं में सहयोग बढ़ने की संभावना है। हालांकि, अंतिम नतीजा दोनों देशों के बीच तय होने वाली शर्तों पर निर्भर करेगा।

