राजनांदगांव जिले में घटिया निर्माण कार्यों ने एक बार फिर नगर निगम और ठेकेदारों की मिलीभगत को उजागर कर दिया है।
बसंतपुर जिला अस्पताल परिसर के शौचालय की सीलिंग गिर गई जिससे केयरटेकर गंभीर रूप से घायल हो गया।
यह शौचालय जून में 8 लाख रुपये की लागत से मरम्मत हुआ था, लेकिन मात्र एक महीने में प्लास्टर ढह गया।
स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत शहर के 73 सार्वजनिक शौचालयों के लिए 5 करोड़ रुपए की राशि आई थी।
इनमें से 22 स्थानों पर मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन जांच में गुणवत्ता की भारी कमी पाई गई है।
शौचालय मरम्मत में भ्रष्टाचार की बू
ठेकेदारों द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की गई है।
नगर निगम की लापरवाही से न तो कार्यों की निगरानी हो पाई और न ही समय पर गुणवत्ता परीक्षण हुआ।
केवल बसंतपुर ही नहीं, अन्य स्थानों पर भी ऐसे हादसे होने की आशंका जताई जा रही है, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है।
डॉ. रमन सिंह ने दिलाई 63 करोड़ की विकास निधि
इस बीच डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से राजनांदगांव के विकास के लिए राज्य सरकार से 63 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है।
इस बजट में 2000 सीटर ऑडिटोरियम, सेंट्रल लाइब्रेरी, सड़क चौड़ीकरण, पाइप लाइन विस्तार जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं।
इसके अलावा ट्रांसपोर्ट नगर, मुक्तिधाम और बसंतपुर अस्पताल क्षेत्र में नाला निर्माण जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू होंगी।
प्रशासन हरकत में, जन चेतावनी का असर
खैरागढ़ में चेतावनी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आया और अन्य कार्यों की भी समीक्षा शुरू कर दी गई है।
लोगों की जागरूकता ने शासन को कार्रवाई के लिए मजबूर किया, जिससे आने वाले समय में सुधार की उम्मीद जगी है।
निष्कर्ष:
राजनांदगांव में घटिया निर्माण कार्यों ने व्यवस्था की खामियों को उजागर किया, वहीं डॉ. रमन सिंह की पहल ने विकास की नई दिशा दिखाई।
