रायपुर के लोक भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े उपहार भेंट किए गए। 22 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल रमेन डेका ने उन्हें राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना की प्रतिकृति भेंट की। इस अवसर पर प्रथम महिला रानी डेका काकोटी भी मौजूद रहीं।
रानी डेका काकोटी ने राष्ट्रपति को प्रदेश की प्रसिद्ध कोसा साड़ी भेंट की। वहीं, राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यपाल को विशिष्ट शैली की चित्रकला उपहार में दी। इन भेंटों के जरिए छत्तीसगढ़ की कला और परंपराओं को सम्मान मिला।
पहाड़ी मैना छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक पहचान
छत्तीसगढ़ का राजकीय पक्षी अपनी अनोखी आवाज और नकल करने की क्षमता के लिए जाना जाता है। बस्तर क्षेत्र में पाई जाने वाली यह मैना राज्य की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
राज्यपाल की ओर से इसकी प्रतिकृति भेंट करना प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को दर्शाता है। पहाड़ी मैना से जुड़ा यह स्मृति चिह्न छत्तीसगढ़ की विशिष्ट पहचान को भी सामने लाता है।
कोसा साड़ी में झलकती है बुनकरों की कला
छत्तीसगढ़ की कोसा साड़ी अपनी बनावट, चमक और पारंपरिक बुनाई के लिए प्रसिद्ध है। इसे तैयार करने में बुनकरों की मेहनत और पारंपरिक शिल्प कौशल की अहम भूमिका रहती है।
प्रथम महिला द्वारा यह साड़ी भेंट करना प्रदेश की समृद्ध हस्तकला को सम्मान देने का प्रतीक बना। पहाड़ी मैना की प्रतिकृति और कोसा साड़ी ने प्राकृतिक विरासत तथा पारंपरिक कला, दोनों को प्रस्तुत किया।
राष्ट्रपति ने राज्यपाल को भेंट की चित्रकला
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी राज्यपाल रमेन डेका को विशिष्ट शैली की चित्रकला भेंट की। इस आदान-प्रदान ने मुलाकात को यादगार बनाया।
स्मृति चिह्नों के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और कलात्मक परंपराओं को प्रमुखता मिली। यह आयोजन स्थानीय कला और शिल्प को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने का अवसर भी बना।
समारोह से जुड़ी प्रमुख जानकारियां
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राज्यपाल रमेन डेका ने राष्ट्रपति को राजकीय पक्षी की प्रतिकृति भेंट की।
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रानी डेका काकोटी ने छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कोसा साड़ी दी।
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राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यपाल को चित्रकला भेंट की।
छत्तीसगढ़ की विरासत को मिला सम्मान
इस मुलाकात में प्रकृति, वस्त्र कला और चित्रकला की झलक देखने को मिली। पहाड़ी मैना की प्रतिकृति ने राज्य की प्राकृतिक पहचान को रेखांकित किया। वहीं, कोसा साड़ी ने पारंपरिक बुनकरों के हुनर को सामने रखा।
इन उपहारों ने छत्तीसगढ़ की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को सम्मानित किया। साथ ही, प्रदेश की विशिष्ट कला और हस्तशिल्प की पहचान को भी प्रमुखता मिली।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। नीचे दी गई तस्वीरों में प्रतिनिधि फोटो भी शामिल हैं।
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